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*श्रीमद् भगवत गीता जीवन जीने की कला सीखने वाला दिव्य ज्ञान है —- योगशक्ति भारती दीदी*  एम के बाहरा में प्रात: ध्यान योग के साथ म्यूजिकल एक्सरसाइज में माताओं ,बहनों एवं बच्चों ने लिए आनंद* ..

बागबाहरा/ :- श्रीमद् भगवत गीता केवल युद्ध का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य ज्ञान है, जो मन को शांत और बुद्धि को एकाग्र कर कर्मयोगी जीवन जीने की प्रेरणा देता है। योगशक्ति ब्रह्माकुमारी भारती दीदी ने श्रीमद् भगवत गीता का जीवन में महत्व बताते हुए उक्त बाते व्यास पीठ से कही । एम. के . बाहरा में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भगवत गीता ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिवस श्रद्धालुओं को बताई कि गीता में कहा है कि आत्म मंथन करके स्वयं को पहचानो क्योंकि जब स्वयं को पहचानोगे तभी क्षमता का आंकलन कर पाओगे। ज्ञान रूपी तलवार से अज्ञान को काट कर अलग कर देना चाहिए। जब व्यक्ति अपनी क्षमता का आंकलन कर लेता है तभी उसका उद्धार हो पाता है। श्री कृष्ण कहते हैं कि मृत्यु एक अटल सत्य है, किंतु केवल यह शरीर नश्वर है। आत्मा अजर अमर है, आत्मा को कोई काट नहीं सकता अग्नि जला नहीं सकती और पानी गीला नहीं कर सकता। जिस प्रकार से एक वस्त्र बदलकर दूसरे वस्त्र धारण किए जाते हैं उसी प्रकार आत्मा एक शरीर का त्याग करके दूसरे जीव में प्रवेश करती है। गीता की बातें मनुष्य को सही तरह से जीवन जीने का रास्ता दिखाती हैं। गीता के उपदेश हमें धर्म के मार्ग पर चलते हुए अच्छे कर्म करने की शिक्षा देते हैं। महाभारत में युद्ध भूमि में खड़े अर्जुन और कृष्ण के बीच के संवाद से हर मनुष्य को प्रेरणा लेनी चाहिए। दीदी ने कहा कि अपने गर्भस्थ शिशु में गीता के ज्ञान का सिंचन अवश्य करें ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी धर्म के मार्ग पर चल सके और आत्म-ज्ञान प्राप्त कर सके।

उन्होंने कहा कि आज के समय में राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांसारिक सभी समस्याओं का समाधान आध्यात्मिकता ही है। मनुष्य की सोच को सुलझाने के रूप में भगवत गीता सुनाई गयी थी, आज वर्तमान समय जीवन में हर किसी के पास तनाव है, और तनाव का मुख्य कारण है कि हमें वस्तुओं से, व्यक्तियों से, अपनी देह से अति लगाव और मोह हो गया है। तनाव से यदि मुक्त होना है तो हर एक को अपने आपको आध्यात्मिक रीति से सशक्त करना होगा। जब तक हमारे अंदर आत्म भाव नहीं आएगा तब तक हम ईश्वर से जुड़ नहीं सकते । ईश्वर से शक्ति लेनी है तो थोड़ा समय अपने लिए निकालें और ईश्वर से अपना मानसिक संबंध जोड़े। , सेवाकेंद्र प्रभारी बी के गायत्री बहन न कर ईश्व प्रात: 05:00 बजे ध्यान योग के साथ म्यूजिकल एक्सरसाइजमे महिलाये ,एवं बच्चों ने खूब आनंद लिए।

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