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अब बस्तर में जिस तरीके से एसडीम साहब ने मुर्गा दारू और खाने पीने की व्यवस्था के लिए सरपंच को टॉर्चर किया अब ऐसा लगता है कि ,,,पत्रकार आर, एल, कुलदीप।*

*विज्ञापन का पैसा देने के लिए वन परिक्षेत्र अधिकारी ने हवाला दिया पूर्व वन मंत्री जब आए थे तो उनके आने-जाने का खर्चा खाने-पीने का खर्च कर दिए।,,,,,पत्रकार आर, एल, कुलदीप।*

 

विज्ञापन का पैसा देने के लिए वन परिक्षेत्र अधिकारी ने हवाला दिया पूर्व वन मंत्री जब आए थे तो उनके आने-जाने का खर्चा खाने-पीने का खर्च कर दिए।,,,,,पत्रकार आर, एल, कुलदीप।*

 

भानुप्रतापपुर

वन विभाग में भी होती है राजनीतिक खर्चा जहां पर संबंधित वन परिक्षेत्राधिकार ने कहा कि कल ही आए थे हमारे पूर्व वन मंत्री जहां पर हमारे द्वारा योजना की पैसा को लगा कर वन मंत्री के लिए आने-जाने का खाना पीने का खर्चा व्यवस्था किया

गया।

 

हमारे द्वारा कहा गया कि रेंजर साहब हमारा पूर्व का विज्ञापन का पैसा बचा हुआ है तो उन्होंने कहा हमारे पास फिलहाल बजट नहीं है। तो मैं तुम्हें कहां से दूं हमारे पास योजनाओं का जो पैसा आता है वह मंत्री से लेकर के तमाम लोग यहां आते हैं विधायक के लिए या अन्य राजनितिक दल के लिए खर्च करना पड़ता है हम जेब से खर्चा थोडिना करेंगे हमारे पास अभी बजट नही है फोन कट।

 

हमारे द्वारा वन परिक्षेत्राधिकार भानुप्रतापपुर मोहन नेताम को पुनः फोन से संपर्क साधने की कोशिश किया गया कि जब पूर्व वनमंत्री आए थे तो कितना राशि खर्च हुआ लेकिन उन्होंने हमारा फोन को रिसीव नहीं किया जिसके चलते हमें खर्च हुई राशि का संपूर्ण जानकारी नहीं मिल पाई।

अब बस्तर में जिस तरीके से एसडीम साहब ने मुर्गा दारू और खाने पीने की व्यवस्था के लिए सरपंच को टॉर्चर किया अब ऐसा लगता है कि भाजपा के कार्यकाल में तमाम विभागों का पैसा नेताओं के पास में बंटवारा होता है जनप्रतिनिधि लोगों में बंटवारा होता है आज जिस तरीके से बस्तर का देखा गया हमें आज 2025 को पता चला कि यहां पर वन विभाग से भी पैसा मतलब कि राजनेताओं पर खर्च किया जाता है।

 

यानी की जनता और वन प्राणी तरसे उनको तरसाना अच्छा लगता है ऐसा लगता है आज आप देख सकते हैं समझ सकते हैं किस तरीके से यहां पर राजनीति हो रही है भाजपा के कार्यकाल में और उसके बावजूद भी अगर पत्रकार कोई लिखता है तो उनके ऊपर राजनेता या राजनीतिक स्तर के लोग या टक पुंजी जो होते हैं जो अपने आप को राजनीति स्तर का बहुत बड़े चमचा तोप समझते हैं वह लोग उन पत्रकारों को जो सच लिखने के लिए कामयाब होते हैं कामयाब रहते हैं उनको दबाव बनाने की कोशिश करते हैं और उनके ऊपर पुलिस प्रशासन के द्वारा कई तरह से प्रताड़ना का आरोप लगा करके उन्हें प्रताड़ित किया जाता है इस तरीके से आप पिछले बार देखे होंगे कि वन विभाग के द्वारा उनके गूर्गो और चमचाओं के द्वारा आर, एल, कुलदीप पत्रकार को जहां खबर प्रकाशित करने के लिए गया था एक तालाब में जहां पर मनरेगा की कार्य चल रही थी वहां पर मशीनीकारण से कार्य किया जा रहा था जिस पर पत्रकार आर, एल कुलदीप ने खबर प्रकाशित किया था तो उनके घर में जाकर उन्हें दबाव बनाया गया था कि आप किस तरीके से कैसे छापे ऐसे करके आपके यहां जीने नहीं देंगे इस तरीके से उनका बातों का उल्लंघन नहीं करते हुए उन्होंने उच्च अधिकारी तहसीलदार को लिखित आवेदन दे करके और उनके कार्यालय के समक्ष पेट्रोल लेकर गया था आत्मदाह करने के लिए इस तरीके से पत्रकारों को प्रताड़ित किया जाता है यहां के तमाम अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा जबकि वहीं कर्मचारियों और अधिकारी इतना भ्रट में घिरे रहते हैं जिनके हिसाब अगर लेना है तो कोई भी जानता आप आरटीआई लगाओ और उनके हिसाब ले लो कोई दिक्कत नहीं है

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