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*मोहला मानपुर—-खुद दूसरों को भवन देने वाली पंचायत आज अपनी छत के लिए मोहताज, टपकती पानी गिरते छत और मलबे के बीच चल रहा सरकारी सिस्टम विकास का ढोल, पंचायत भवन या खंडहर!*

मनीष कौशिक

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी–सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास की बड़ी-बड़ी तस्वीरों के बीच ग्राम पंचायत तोलूम की हकीकत व्यवस्था को आईना दिखा रही है। जिस पंचायत ने गांव के विकास के लिए कदम-कदम पर काम किया, आज वही पंचायत अपने ही भवन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।पंचायत भवन या जर्जर ढांचा? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। भवन की छत बरसात में पानी रोकने के बजाय खुद पानी बरसाती है। दीवारें कमजोर हो चुकी हैं, छत से मलबा गिर रहा है और कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की आंखों पर जैसे लापरवाही की पट्टी बंधी हुई है सरपंच ने पंचायत भवन की बदहाली को लेकर कई बार जनदर्शन, मुख्यमंत्री और शासन स्तर पर लिखित गुहार लगाई, नया भवन स्वीकृत करने की मांग की, लेकिन वर्षों बाद भी हालात जस के तस हैं। शिकायतें कागजों से निकलकर जमीन तक नहीं पहुंच पाईं हालात यह हैं कि जिस पंचायत भवन से ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, वहीं आज सरपंच-सचिव खुद समस्याओं के बीच बैठकर काम करने को मजबूर हैं।

*मंत्री के जिले में पंचायत भवन की दुर्दशा, व्यवस्था पर बड़ा सवाल*

छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के प्रभारी मंत्री हैं। ऐसे में जिले की एक ग्राम पंचायत का वर्षों से जर्जर भवन में संचालित होना शासन के विकास दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।ग्रामीणों का कहना है कि अगर पंचायत भवन की छत गिरने के बाद ही प्रशासन जागेगा, तो फिर शिकायतों और मांग पत्रों का क्या मतलब रह जाएगा?अब सवाल सिर्फ नए भवन का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने का है।आखिर कब तक तोलूम पंचायत के लोग खंडहरनुमा भवन में बैठकर विकास की उम्मीद लगाए बैठे रहेंगे?तस्वीर साफ है बाहर विकास की बातें, अंदर पंचायत भवन की बदहाली। अब देखना है कि जिम्मेदारों की नींद कब टूटती है।

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