मनीष कौशिक
मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी—-नए शिक्षा सत्र 2026-27 की शुरुआत तो हो चुकी है । अंबागढ़ चौकी की ब्लाक के माहुद मचांदुर स्कूल के विद्यार्थियों की समस्याओं के निराकरण की शुरुआत होना बाकी है । जर्जर होने विद्यालय में बच्चे रोज एक नई समस्या का सामना करने के लिए मजबूर हैं। जर्जर भवन, छत व दीवार की उखड़ी हुई प्लास्टर, छत की सरिया बहार , जगह-जगह टूटी फर्श , टपकते हुए छत तथा परिसर में घुटनों तक भरा पानी, इस वर्ष भी भविष्य सवारनें आए छात्रों विद्यार्थियों के नसीब यही है । साल बदल गए बच्चे बदल गए, पर समस्याएं बदलने का नाम नहीं ले रही।माहुद मचांदुर का नाम सुनते ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालो के गांव में स्थित इस विद्यालय से पढ़ने वाले अधिकतर विद्यार्थी अफसर, इंजीनियर, शिक्षक, डाक्टर , वकील तथा बड़े-बड़े संस्थानों में प्रतिष्ठित पदों पर विराजमान हैं। मगर ऐसे गांव के विद्यालय के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा

*टपकती छत के नीचे पढ़ाई करने पर मजबूर बच्चे*
दो दशक से भी अधिक समय से बना हायर सेकंडरी स्कूल का भवन में इस वर्ष भी लगभग ढाई सौ से भी ज्यादा बच्चे अपना भविष्य सवारेंगे। इस विद्यालय की हर कक्षा की छतों से पानी टपकता है। बारिश के मौसम में बच्चे गीले में बैठने के लिए मजबूर रहते हैं। सूखे मौसम में यदि बंदरों का झुंड छतों पर कूदने लगे तो बच्चों और शिक्षकों का भय से हाल बेहाल हो जाता है । माहुद मचांदुर गांव के अलावा इस विद्यालय में आसपास के 5-6 से अधिक गांव के बच्चे पढ़ने आते हैं जो इस समस्या से जूझने के लिए मजबूर हैं। बारिश की स्थिति में कमरों में पानी टपकने लगता है , बच्चों की कापी किताब भीगने लगती है , फिर कक्षाओं को बंद करना पड़ता है जिससे अध्यापन कार्य प्रभावित होता है। पर्याप्त कक्ष न होने के कारण खूले में शिक्षकों को पढ़ाना पड़ता है।आमतौर पर आसपास के गांव के बच्चे यहां पढ़ने आते हैं, जिनको विद्यालय के मैदान से कक्ष तक पहुंचने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। परिसर में पानी भरे व कीचड़ होने के कारण गिरने का डर रहता है , जिसमें इन तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
*स्कूल छत की कंक्रीट व दीवारों के प्लास्टर उखड़ रहे*
स्कूल भवन की छत की कंक्रीट व दीवारों की प्लास्टर उखड़ कर गिर रही है । हाल ही में स्टाफ रूम की छत उखड़ कर गिर गई । विद्यालय का संचालन करने वाले स्कूल शिक्षा विभाग को शायद किसी अप्रिय घटना का इंतजार है। कमरों की छतों में दरारें आ चुकी हैं तथा कमरो के फर्श पर सांप-बिच्छू आसानी से बिल बना लेते हैं । बालकों के लिए शौचालय के नाम पर टूटी दिवारें तथा टूटे हुए दरवाजे हैं । कई बार ग्रामीणों ने स्कूल व वहा की स्थितियों की समस्या लगातार क्षेत्र के बड़ें व छोटे जनप्रतिनिधियों के सामने कई बार रखी है, लेकिन गांव वालो को झूठे आश्वासन के आलावा कुछ नहीं मिला । स्कूल मे क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों तथा शिक्षा विभाग का भी आना जाना रहा है परन्तु समस्या को देखकर भी अनदेखी की गई है। हालांकि पिछले दो वर्षों से स्कूल की समस्या सुधारने की कोशिश की जा रही है लेकिन कोशिश कारगर नहीं हो पाई। मरम्मत के नाम पर लिपापोती होती है, लेकिन बच्चों की समस्या जस की तस है। परेशानी बढ़ती जा रही है। चारदीवारी न होने से मवेशियों व असामाजिक तत्वों का बेखौफ विचरण होता है।

