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*घर के हुनर को कारोबार बनाया, अब अचार के स्वाद से आत्मनिर्भर बन रहीं शशिरेखा*,,,,,,,,, ,,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

*घर के हुनर को कारोबार बनाया, अब अचार के स्वाद से आत्मनिर्भर बन रहीं शशिरेखा*,,,,,,,,,

,,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

*एनआरएलएम और स्व-सहायता समूह से मिला सहयोग, रुद्रारम की शशिरेखा ने घरेलू हुनर को बनाया आजीविका का मजबूत साधन*

बीजापुर,,,,,,,,,,,,,, कभी घर की रसोई तक सीमित रहने वाला अचार बनाने का हुनर आज श्रीमती शशिरेखा बरचेटटी की पहचान और आय का जरिया बन चुका है। ग्राम रुद्रारम की रहने वाली शशिरेखा ने अपने पारंपरिक हुनर को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग के साथ स्वरोजगार में बदला है। आज वे आम, नींबू, मिर्च सहित विभिन्न प्रकार के अचार तैयार कर उनका विक्रय कर रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों में अपना योगदान दे रही हैं।

*हुनर पहले से था, बस अवसर की जरूरत थी*

ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी शशिरेखा को घर पर विभिन्न खाद्य पदार्थ और अचार तैयार करने का अनुभव था। यह हुनर उनके लिए हमेशा घरेलू काम का हिस्सा रहा, लेकिन इससे आय अर्जित करने के बारे में उन्होंने कभी गंभीरता से नहीं सोचा था। परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त आय के साधन की जरूरत महसूस हुई तो उन्होंने अपने इसी हुनर को आजीविका का माध्यम बनाने का निर्णय लिया।

इसी दौरान वे एनआरएलएम से जुड़ीं और ग्राम रुद्रारम के वैभव लक्ष्मी स्व-सहायता समूह का हिस्सा बनीं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण और आजीविका गतिविधियों के संबंध में जानकारी मिली। समूह की महिलाओं से मिले प्रोत्साहन और मार्गदर्शन ने उनके भीतर अपने काम को व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने का विश्वास पैदा किया।

*रसोई से शुरू हुआ सफर, बाजार तक पहुंचा*

शशिरेखा ने छोटे स्तर पर अचार बनाकर इसकी शुरुआत की। स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध आम, नींबू, हरी मिर्च और अन्य मौसमी उत्पादों का उपयोग कर वे अलग-अलग स्वाद के अचार तैयार करने लगीं। शुरुआत में उत्पादन सीमित था, लेकिन गुणवत्ता और स्वच्छता पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया।

धीरे-धीरे उनके बनाए अचार की मांग आसपास के गांवों और स्थानीय बाजार में बढ़ने लगी। लोगों को अचार का स्वाद और गुणवत्ता पसंद आने लगी। ग्राहकों की बढ़ती मांग ने शशिरेखा का उत्साह बढ़ाया और उन्होंने उत्पादन का दायरा भी धीरे-धीरे बढ़ाना शुरू किया।

*समूह से मिला सहयोग बना आगे बढ़ने का आधार*

स्व-सहायता समूह से जुड़ना शशिरेखा के लिए केवल बचत और आर्थिक गतिविधि तक सीमित नहीं रहा। समूह के माध्यम से उन्हें अपनी आजीविका गतिविधि को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की समझ मिली। बचत, ऋण के उपयोग, व्यवसाय में दोबारा निवेश और उत्पाद की बिक्री जैसे पहलुओं को समझने में समूह की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

अचार की बिक्री से प्राप्त आय का एक हिस्सा वे फिर से अपने काम में लगाती हैं। इस तरह उनका छोटा-सा घरेलू काम धीरे-धीरे नियमित आय की गतिविधि में बदलता गया। आज अचार निर्माण उनके लिए केवल अतिरिक्त काम नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

*कमाई के साथ बढ़ा आत्मविश्वास*

शशिरेखा के लिए इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल आय अर्जित करना नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास हासिल करना है। अब वे अपने हुनर के आधार पर आर्थिक गतिविधि संचालित कर रही हैं और परिवार की जरूरतों में आर्थिक भागीदारी निभा रही हैं।

वे बताती हैं कि पहले जिस काम को वे केवल घर के लिए करती थीं, उसी काम से आज दूसरे लोग उनके बनाए उत्पाद खरीद रहे हैं। इससे उनमें अपने काम को और बेहतर करने तथा आगे बढ़ाने का विश्वास पैदा हुआ है।

*अब बड़े बाजार तक पहुंचने का सपना*

अचार की बढ़ती मांग से उत्साहित शशिरेखा अब अपने व्यवसाय को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आकर्षक और बेहतर पैकेजिंग अपनाना तथा स्थानीय बाजार से आगे अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना है।

उनकी कहानी बताती है कि ग्रामीण महिलाओं के पास मौजूद पारंपरिक कौशल को यदि उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और बाजार से जोड़ने का अवसर मिले, तो वही हुनर परिवार की आय बढ़ाने और महिला आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है।

शशिरेखा कहती हैं—

“एनआरएलएम से जुड़ने और स्व-सहायता समूह का सहयोग मिलने से मुझे अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर मिला। पहले मैं अचार घर के लिए बनाती थी, लेकिन अब इसी काम से आमदनी हो रही है। इससे मुझे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग करने का अवसर मिला है और अपने काम को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी आया है।”

*बदलाव की कहानी*

शशिरेखा बरचेटटी की कहानी किसी बड़े कारोबार से शुरू नहीं हुई। इसकी शुरुआत घर की रसोई और उनके पारंपरिक हुनर से हुई। एनआरएलएम और स्व-सहायता समूह ने उस हुनर को अवसर दिया और शशिरेखा ने अपनी मेहनत से उसे आजीविका का साधन बना लिया।

यह कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। हुनर, मेहनत और सही अवसर मिल जाए तो घर की चौखट से शुरू हुआ काम भी परिवार की आर्थिक मजबूती और महिला सशक्तिकरण का आधार बन सकता है।

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