मनीष कौशिक
मोहला —नक्सल हिंसा की पीड़ा झेल चुके परिवारों के लिए जिला प्रशासन ने राहत और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नक्सल पुनर्वास नीति के तहत जिले के 5 नक्सल पीड़ित परिवारों के पात्र सदस्यों को शासकीय सेवा में नियुक्ति दी गई है। जिला कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान कलेक्टर श्रीमती तनुजा सलाम ने नवनियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पीड़ा से आत्मनिर्भरता तक… सरकारी नौकरी ने दी नई उम्मीद
नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए सरकारी नौकरी महज रोजगार का अवसर नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती, सामाजिक सम्मान और स्थायी भविष्य की ओर बढ़ता एक अहम कदम है। शासन की पुनर्वास नीति के तहत की गई इस नियुक्ति से प्रभावित परिवारों को अपने जीवन को नए सिरे से संवारने का अवसर मिला है।इन सभी 5 पात्र सदस्यों की नियुक्ति आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावास एवं आश्रमों में भृत्य पद पर की गई है। नियुक्ति प्राप्त करने वालों में रवि दुग्गा, अजय कुमार सलामे,दिलसाय कोरेटी, समीला पूड़ो एवं पायल ईश्वर पूड़ो शामिल हैं।
कलेक्टर ने कहा—जिम्मेदारी के साथ निभाएं दायित्व
नवनियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करते हुए कलेक्टर तनुजा सलाम ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवा केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि शासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है।उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करने की अपील की। साथ ही कार्यस्थल पर अनुशासन, समर्पण और बेहतर कार्य संस्कृति के साथ सेवाएं देने के लिए प्रेरित किया।
परिवार को मिला आर्थिक संबल, भविष्य को मिली मजबूती
नक्सल पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा से प्रभावित परिवारों को केवल तत्काल राहत देना नहीं, बल्कि उन्हें **स्थायी रूप से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और आत्मनिर्भर बनाना** भी है। इसी उद्देश्य के तहत पात्र परिवारों के सदस्यों को शासकीय सेवा का अवसर दिया गया है।सरकारी नौकरी मिलने से इन परिवारों को नियमित आय के साथ आर्थिक स्थिरता मिलेगी। वहीं परिवार के बच्चों की शिक्षा, बेहतर जीवन और भविष्य की योजनाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पुनर्वास की पहल बनी भरोसे की नई कड़ी
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और विश्वास की स्थापना के लिए पुनर्वास सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा नक्सल पीड़ित परिवारों के पात्र सदस्यों को शासकीय सेवा में अवसर देना पुनर्वास की प्रक्रिया को जमीन पर मजबूती देने वाली पहल माना जा रहा है।यह नियुक्ति उन परिवारों के लिए एक संदेश भी है कि हिंसा से प्रभावित जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए शासन उनके साथ खड़ा है। बीते संघर्ष की छाया से निकलकर अब इन पांच परिवारों के सदस्यों ने सरकारी सेवा के जरिए एक नई शुरुआत की है जहां उम्मीद है, आत्मनिर्भरता है और बेहतर भविष्य का रास्ता भी।

