मनीष कौशिक
मोहला—ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर खर्च हो रही सरकारी राशि, निर्माण कार्यों के बिल और 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर जानकारी मांगने पहुंचे पत्रकार के सामने पंचायत के सरपंच-सचिव के कथित जवाब ने अब नई चर्चा छेड़ दी है। जानकारी लेने और पक्ष जानने पर सरपंच-सचिव ने कथित तौर पर कहा कि “हम अपना बयान नहीं दे सकते, आप जनपद पंचायत सीईओ से बयान ले सकते हैं। सब कुछ हम लोग मैनेज कर के बैठे हैं।”मामला उस समय सामने आया जब पत्रकार ग्राम पंचायत पहुंचकर निर्माण कार्यों में लगाए गए बिल, भुगतान और 15वें वित्त की राशि के उपयोग से संबंधित जानकारी लेने पहुंचा। पंचायत में हुए कार्यों और सरकारी राशि के खर्च को लेकर सवाल पूछे गए तथा जिम्मेदारों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। इसी दौरान सरपंच-सचिव की ओर से कथित तौर पर अपना बयान देने से इनकार करते हुए जनपद पंचायत सीईओ से बयान लेने की बात कही गई।
*‘सब कुछ मैनेज’—किस ओर इशारा?*
सरपंच-सचिव के कथित बयान में सबसे ज्यादा चर्चा ‘सब कुछ मैनेज कर के बैठे हैं’ वाले हिस्से की हो रही है। आखिर किस स्तर पर क्या ‘मैनेज’ किया गया है? क्या इसका संबंध पंचायत के कामकाज से है, अधिकारियों से है या किसी अन्य स्तर से? इसका स्पष्ट जवाब पंचायत के जिम्मेदारों और संबंधित अधिकारियों से ही सामने आ सकता है।
*बिल और 15वें वित्त की राशि पर उठे सवाल*
अब सवाल पंचायत में हुए निर्माण कार्यों के बिल और 15वें वित्त की राशि के खर्च से जुड़ा है। किस कार्य में कितनी राशि खर्च हुई? भुगतान किसे किया गया? कार्य मौके पर कितना हुआ? भुगतान से पहले आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई या नहीं? इन सभी बिंदुओं की जांच पंचायत के रिकॉर्ड, बिल-वाउचर और मौके की स्थिति से की जा सकती है।
*CEO से बयान लेने की बात ने बढ़ाई जिम्मेदारी*
जब पंचायत के सरपंच-सचिव ने खुद बयान देने के बजाय जनपद पंचायत सीईओ से बयान लेने की बात कही है, तो अब निगाहें जनपद पंचायत कार्यालय पर टिक गई हैं। सवाल यह भी है कि पंचायत के वित्तीय मामलों और कथित ‘मैनेज’ वाली बात पर जनपद स्तर के अधिकारी क्या कहते हैं?
*सरकारी पैसा, सार्वजनिक हिसाब—फिर पर्दे के पीछे क्या?*
पंचायत में खर्च होने वाली राशि सरकारी है और उसके उपयोग का रिकॉर्ड भी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज होता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सभी कार्य और भुगतान नियमों के अनुसार हैं, तो उनका रिकॉर्ड और स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने में परेशानी क्या है?अब देखना होगा कि जनपद पंचायत मोहला इस पूरे मामले को किस नजर से देखती है। कथित ‘सब कुछ मैनेज’ वाले बयान की वास्तविकता क्या है और पंचायत के बिलों व 15वें वित्त की राशि का हिसाब कितना पारदर्शी है—इसका जवाब अब सरकारी रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच से ही सामने आएगा।

