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*मानपुर—-15वें वित्त आयोग की राशि में बड़ा खेल? ग्राम पंचायत तोलूम में कच्चे बिलों से भुगतान का मामला, सरपंच-सचिव के बयानों ने बढ़ाए सवाल*

मनीष कौशिक

मोहला-मानपुर—ग्रामीण विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर ग्राम पंचायत तोलूम में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार पंचायत में जीएसटी टैक्स इनवॉइस (GST Tax Invoice)के स्थान पर कच्चे बिलों के आधार पर शासकीय राशि का भुगतान किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पंचायत राज अधिनियम, वित्तीय नियमों और शासकीय खरीद प्रक्रिया के खुले उल्लंघन का मामला बन सकता है।दस्तावेजों से यह भी संकेत मिलते हैं कि 15वें वित्त आयोग की राशि से किए गए भुगतान में आवश्यक वित्तीय प्रक्रिया और पारदर्शिता का समुचित पालन नहीं किया गया। जिन बिलों के आधार पर भुगतान हुआ, उनमें कई स्थानों पर जीएसटी पंजीकरण, टैक्स इनवॉइस और वैधानिक कर संबंधी जानकारी का अभाव दिखाई देता है। इससे सरकारी राशि के उपयोग की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि किसी सामग्री या सेवा पर जीएसटी लागू था, तो वैध टैक्स इनवॉइस के बिना भुगतान करना नियमों के विपरीत माना जा सकता है। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

*सरपंच का जवाब भी बना चर्चा का विषय*

जब इस संबंध में ग्राम पंचायत तोलूम की सरपंच घमोतिन पद्दा से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा “मुझे ज्यादा जानकारी नहीं थी कि बिल किस प्रकार लगाए जाते हैं।”सरपंच का यह बयान कई नए सवाल खड़े करता है कि यदि वित्तीय प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी, तो शासकीय राशि के भुगतान की अनुमति और प्रमाणन किस आधार पर किया गया।

*सचिव ने माना कि चूक हुआ है कच्चे बिल के भुगतान में*

वहीं पंचायत सचिव से इस विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा”पहले जानकारी नहीं था, लेकिन अब हम जीएसटी बिल लगाकर ही भुगतान कर रहे हैं।”सचिव का यह स्वीकारोक्ति वाला बयान भी इस ओर संकेत करता है कि पहले की भुगतान प्रक्रिया में नियमों के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न उठ सकते हैं।

*अब प्रशासन से जवाब मांगते बड़े सवाल*

क्या 15वें वित्त आयोग की राशि का व्यय निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुरूप किया गया?जीएसटी लागू होने के बावजूद वैध टैक्स इनवॉइस के स्थान पर कच्चे बिलों से भुगतान क्यों किया गया?भुगतान से पहले संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन किया था या नहीं?क्या पंचायत अधिनियम और शासकीय वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया?यदि अनियमितता हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?फिलहाल यह मामला निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। यदि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता “सरकारी धन जनता की अमानत है। यदि उसके उपयोग में नियमों की अनदेखी हुई है, तो जवाबदेही तय होना ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी होगी।”

 

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