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*महाअष्टमी  में जगत जननी मां महागौरी की आराधना,  पूजा-विधि, मंत्र, भोग और संपूर्ण अनुष्ठान* * नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

*महाअष्टमी  में जगत जननी मां महागौरी की आराधना,  पूजा-विधि, मंत्र, भोग और संपूर्ण अनुष्ठान*

* नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में शारदीय और चैत्र नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को महाअष्टमी या दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस पावन दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां की विधिवत पूजा करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।

*1. मां महागौरी का स्वरूप और नाम का महत्व*

* स्वरूप: मां महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर (श्वेत) है, इसीलिए इन्हें ‘महागौरी’ कहा जाता है। इनकी तुलना शंख, चंद्र और कुंद के फूल से की जाती है। इनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत रंग के ही हैं।

* वाहन: मां महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है, इसीलिए इन्हें ‘वृषारूढ़ा’ भी कहा जाता है।

* चतुर्भुज रूप: मां के चार हाथ हैं। इनके ऊपर वाले दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाले बाएं हाथ में वरद मुद्रा है।

* कथा: भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इन्होंने कठोर तपस्या की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था। इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने जब गंगा के पवित्र जल से इनका अभिषेक किया, तब इनका शरीर विद्युत के समान कांतिवान और अत्यंत गौर हो गया, तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा।

*2. पंचांग अनुसार महत्व एवं तिथि*

पंचांग के अनुसार, महाअष्टमी का दिन महासंयोग और विशेष ऊर्जा का प्रतीक होता है। इस दिन माता के दर्शन मात्र से ही कई यज्ञों के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। कई घरों और मंदिरों में इस दिन कन्या पूजन (कंजक) का विशेष विधान है, जिसमें 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की कन्याओं को मां का रूप मानकर पूजा जाता है।

3. वस्त्र और रंग (विशेष चढ़ावा)

* प्रिय रंग: मां महागौरी को सफेद (श्वेत) या गुलाबी रंग अत्यंत प्रिय है।

* वस्त्र: इस दिन साधक को स्नान के बाद श्वेत या गुलाबी वस्त्र धारण कर, मां को भी इसी रंग के वस्त्र या चुनरी अर्पित करनी चाहिए।

* विशेष चढ़ावा: मां को शृंगार का सामान (लाल सिंदूर, महावर, चूड़ियां, बिंदी, आलता, इत्र और लाल चुनरी) अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुहाग की पिटारी चढ़ाने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

*4. महाभोग और प्रसाद*

मां महागौरी को उनकी प्रसन्नता के लिए विशेष व्यंजनों का भोग लगाया जाता है:

* मुख्य भोग: मां को नारियल या नारियल से बनी मिठाई का भोग अत्यंत प्रिय है।

* कन्या पूजन भोग: महाअष्टमी के दिन विशेष रूप से हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगाया जाता है और यही प्रसाद कन्याओं को परोसा जाता है।

*5. पूजा-पाठ विधि एवं विधान*

* ब्रह्म मुहूर्त स्नान: प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

* कलश स्थापना पूजन: यदि घर में घटस्थापना की गई है, तो सबसे पहले गणेश-अंबिका, नवग्रह और कलश देवताओं की पूजा करें।

* चौकी सजाएं: लकड़ी की चौकी पर श्वेत वस्त्र बिछाकर मां महागौरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

* षोडशोपचार पूजा: मां को रोक्षत, अक्षत, सफेद फूल, चमेली या रात की रानी के पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

* मंत्र जाप: रुद्राक्ष की माला से मां के मूल मंत्र का कम से कम एक या पांच माला जाप करें।

* दुर्गा सप्तशती पाठ: इस दिन दुर्गा सप्तशती के मध्यम चरित्र का पाठ या संपूर्ण पाठ करना बहुत फलदायी माना जाता है।

*6. अचूक मंत्र एवं स्तुति*

ध्यान मंत्र

> पूर्णेंदु निभा गौरी मनेवृषसंस्थिता हस्तत्रिशूल डमरूधरां भजेम्।

 

मूल मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौरी नमः

 

देवी प्रार्थना (सर्वमंगलकारी)

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 

*7. महाअष्टमी के विशेष क्रिया-कलाप एवं अनुष्ठान*

* संधि पूजा (विशेष समय): अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल (संधि काल) में मां दुर्गा की विशेष पूजा और बलि (प्रतीकात्मक रूप से फल या खीर की आहुति) दी जाती है। इस समय 108 दीपक जलाने की परंपरा है।

* हवन: कई स्थानों पर महाअष्टमी के दिन या नवमी के दिन विधि-विधान से हवन किया जाता है। अग्नि में आहुति देकर नवरात्रि व्रत की पूर्णता की कामना की जाती है।

* कन्या पूजन एवं लंगूरा पूजा: कन्याओं के चरण धोकर उन्हें आसन पर बैठाएं, उनके माथे पर रोली-अक्षत लगाएं, भोजन कराएं और अंत में दक्षिणा व उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें। इसके साथ एक बालक (बटुक भैरव) को भी भोजन अवश्य कराएं।

*8. महाआरती*

संध्या के समय या पूजा के अंत में कपूर और घी के दीपक से मां महागौरी की आरती करें:

जय महागौरी जगत की माया। जै उमा भवानी जय महामाया॥

हरिद्वार मन कि आसन है मेरा। महा शक्ति रूप में डेरा तेरा॥

कठिन तपस्या तुमने की जब। भयों प्रकट वरदान तब॥

चतुरभुज रूप विराजित सोहे। रूप देख सुर-मुनि मन मोहे॥

जो कोई आवे तेरी द्वारे। सब की विपत मिटावें सारे॥

मार्कण्डेय पूजत पद सेवा। महिमा तेरी गावे देवा॥

महागौरी मां की आरती जो गावे। सुख-समृद्धि घर में पावे॥

 

विशेष नोट: महाअष्टमी की रात्रि को मां भगवती की जागरण या भजन-कीर्तन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मकता एवं माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

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