बीजापुर। रूढ़ि जन्य परंपरागत सर्व आदिवासी समाज बीजापुर के जिलाध्यक्ष एवं सीमांत कृषक अशोक कुमार तलांडी ने शासन-प्रशासन को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसान अन्नदाताओं के साथ घोर अन्याय कर रही है और जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं का समाधान करने में विफल साबित हो रही है।

तलांडी ने कहा कि सरकार द्वारा ग्राम स्वराज, ग्राम सुराज और सुशासन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले में लोगों की समस्याओं के समाधान तथा उनके सुख-दुख में सहभागी बनने का दावा किया जाता है, लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कई मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि नियमित रूप से पंजीकृत किसान अन्नदाताओं को अब तक पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पाई है। खाद के लिए किसानों को लैम्प्स समितियों से लेकर अधिकारियों के कार्यालयों तक चक्कर लगाने और सड़क पर उतरकर अपनी मांग रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों का शासन की कृषि ऋण व्यवस्था के साथ नियमित लेन-देन है तथा वे शासन के माध्यम से खाद और बीज प्राप्त करते हैं, इसके बावजूद समय पर खाद उपलब्ध नहीं कराया जाना गंभीर चिंता का विषय है।
अशोक कुमार तलांडी ने कहा कि सरकार के मुखिया स्वयं को गरीब परिवार और किसान का बेटा बताते हैं, लेकिन यदि वास्तव में सरकार किसान हितैषी है तो किसानों को फसल के अनुकूल समय पर खाद उपलब्ध क्यों नहीं कराई जा रही है? उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा लैम्प्स अथवा उच्च अधिकारियों से संपर्क करने पर लगातार डिमांड भेजे जाने और खाद आते ही वितरण किए जाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन समय बीतता जा रहा है और किसानों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि “भूख मिटने के बाद खाना क्यों और फसल का समय बीत जाने के बाद खाद क्यों?” किसानों को यदि समय पर खाद नहीं मिलेगी तो खेती का पूरा चक्र प्रभावित होगा और इसका सीधा असर उत्पादन तथा किसान की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
तलांडी ने आरोप लगाया कि खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होने के कारण किसान परेशान होकर अन्य राज्यों से महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि पंजीकृत किसानों की खाद संबंधी समस्या का तत्काल संज्ञान लेकर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसान अपनी फसल का समय पर प्रबंधन कर सकें।
अंत में अशोक कुमार तलांडी ने शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को खाद के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और उनकी समस्या का यथाशीघ्र समाधान किया जाए। यदि समय रहते खाद की समस्या का निराकरण नहीं किया गया, तो किसान व्यापक आंदोलन एवं जंगी प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

