आज दिनांक 7 फरवरी 2025 को मैं स्वयं (सतीश वानखेड़े) अपने इलाज हेतु आडवाल सरकारी अस्पताल गया था। मेरा हाथ घायल था और मुझे उपचार की आवश्यकता थी, लेकिन अस्पताल की स्थिति अत्यंत चिंताजनक पाई गई।

अस्पताल में उपस्थित नर्सिंग स्टाफ स्वास्थ्य कर्मी मरीजों की देखभाल करने के बजाय मोबाइल फोन पर रील देखने में व्यस्त थे। मरीजों की कोई सुनवाई नहीं की जा रही थी। जब मैंने अपनी समस्या बताने की कोशिश की, तो किसी ने गंभीरता से ध्यान ही नहीं दिया।
वहाँ मौजूद स्टाफ द्वारा न तो उचित इलाज किया गया और न ही जिम्मेदारी का पालन किया गया। उल्टा यह कहकर टालने की कोशिश की गई कि “टीका दे देंगे” या “बाद में देखेंगे”, लेकिन वास्तविक उपचार नहीं किया गया।
इस गंभीर लापरवाही को लेकर मैंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) महोदय से फोन पर बात की और उन्हें अस्पताल की अव्यवस्था से अवगत कराया। किंतु बातचीत के दौरान भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह मनमर्जी से चल रही है।
मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि जब मेरे साथ—जो एक संगठन का जिला अध्यक्ष हूँ—ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम जनता और गरीब मरीजों की स्थिति क्या होगी, इसकी कल्पना की जा सकती है।
मैं जिला प्रशासन एवं जिला अधिकारी महोदय से माँग करता हूँ कि इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए, दोषी नर्सों एवं संबंधित कर्मचारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज के साथ इस प्रकार की लापरवाही न हो।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी ऐसी गैर-जिम्मेदारी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
जनहित में जारी।
सतीश वानखड़े
जिला अध्यक्ष
अखिल भारतीय परिसंघ

