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*प्रधानमंत्री आवास के नाम पर  ,सचिव द्वारा 80 हजार की वसूली, गरीब आदिवासि आज भी खपरैल झोपडी में निवास रथ है*, दीपक मरकाम की खबर,

*प्रधानमंत्री आवास के नाम पर  ,सचिव द्वारा 80 हजार की वसूली, गरीब आदिवासि आज भी खपरैल झोपडी में निवास रथ है*, दीपक मरकाम की खबर,

*दम्मूर पंचायत में निगरानी के अभाव में एक वर्ष से दबा रहा मामला, हितग्राही सचिव के पीछे भटकते रहे और जिम्मेदार अधिकारी बने रहे अनजान*

 

बीजापुर – प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच ग्राम पंचायत दम्मूर में सामने आया एक मामला ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

पंचायत के तत्कालीन सचिव ओम प्रकाश कोरम पर आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना से स्वीकृत दो आदिवासी हितग्राहियों से मकान बनवाने के नाम पर 40-40 हजार रुपये कुल 80 हजार रुपये लिए लेकिन न तो मकान बनवाया गया और न ही अब तक राशि वापस की गई।

 

पीड़ित हितग्राही सुरेश चिडे़म का कहना है कि उन्होंने पक्के मकान बनाकर देने की उम्मीद में सचिव को राशि दी थी। इसके बाद आवास निर्माण कार्य शुरू तो हुआ लेकिन केवल गड्ढे खोदकर निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। समय बीतता गया, लेकिन न मकान बन पाया और न ही हितग्राहियों को उनकी राशि वापस मिली।

 

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बीते एक वर्ष से अधिक समय के दौरान न तो इंजीनियर ने स्थल का निरीक्षण किया और न ही जनपद पंचायत के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। यदि समय-समय पर निरीक्षण और निगरानी की जाती तो हितग्राहियों की परेशानी सामने आ सकती थी और कथित अनियमितता की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को पहले ही मिल जाती।

 

जून 2025 से अब तक एक वर्ष का लंबे समय हो गया मामला पूरी तरह दबा रहा और गरीब आदिवासी परिवार अपने हक के लिए भटकते रहे। हितग्राहियों ने कई बार सचिव से आवास बनाकर देने या राशि वापस की मांग की लेकिन अब तक न आवास बना और न ही राशि वापस करने की कोई पहल की गई।

 

इस पूरे मामले को लेकर जनपद पंचायत भोपालपटनम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आदित्य कुंजाम से बात की गई तो उन्होंने बयान देने के लिए अधिकृत नहीं होने और जिला पंचायत के सीईओ से बयान लेने की बात कही। अब प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और गरीब हितग्राहियों को न्याय कब तक मिल पाता है।

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