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* ब्रेकिंग न्यूज: बस्तर दशहरा में इस बार शामिल नहीं होंगे मुंडा बाजा वादक! ,6 साल से मानदेय का इंतजार, प्रशासन को लिखित आश्वासन देने की मांग*

* ब्रेकिंग न्यूज: बस्तर दशहरा में इस बार शामिल नहीं होंगे मुंडा बाजा वादक! ,6 साल से मानदेय का इंतजार, प्रशासन को लिखित आश्वासन देने की मांग*

बस्तर सम्भाग जगदलपुर

*एक महीने पहले बस्तर महाराजा कमलचंद्र भंजदेव, दशहरा समिति अध्यक्ष एवं सांसद महेश कश्यप, कलेक्टर और तहसीलदार को दिया था आवेदन; कार्रवाई नहीं होने से वादकों में नाराजगी*

 

जगदलपुर ::::बस्तर की ऐतिहासिक और पारंपरिक पहचान बस्तर दशहरा में इस बार मुंडा बाजा वादकों की भागीदारी पर संकट खड़ा हो गया है।

पिछले छह वर्षों से मानदेय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए 30 मुंडा बाजा वादकों ने इस बार दशहरा में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है।

वादकों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी मांग पूरी नहीं हुई है। अब वे प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने पर ही दशहरा में शामिल होने को तैयार हैं।

 

*एक महीने पहले दिया आवेदन, फिर भी कार्रवाई नहीं*

मुंडा बाजा वादकों के अनुसार, मानदेय की समस्या से संबंधित आवेदन एक महीने पहले बस्तर महाराजा कमलचंद्र भंजदेव, बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं बस्तर सांसद महेश कश्यप, बस्तर कलेक्टर और जगदलपुर तहसीलदार को सौंपकर पूरे मामले से अवगत कराया गया था।

इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वादकों का कहना है कि उन्हें ऐसा कोई भरोसेमंद आश्वासन भी नहीं मिला है, जिसके आधार पर वे अपनी परंपरागत जिम्मेदारी निभाने का निर्णय ले सकें।

 

* छह साल से आश्वासन, लेकिन मानदेय नहीं मिलने का आरोप*

वादकों ने बताया कि वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा मांझी, मेम्बरिन और मुंडा बाजा वादकों को प्रतिमाह 2,000 रुपये मानदेय देने की घोषणा किए जाने की बात कही गई थी। उनका आरोप है कि छह वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है। वादकों का कहना है कि अन्य संबंधित वर्गों को मानदेय मिल रहा है, लेकिन मुंडा बाजा वादक इससे वंचित हैं। इस भेदभाव को लेकर उन्होंने दुख जताया है।

 

* लिखित आश्वासन मिलने पर ही दशहरा में शामिल होंगे वादक*

मुंडा बाजा वादकों ने स्पष्ट किया है कि वे बस्तर दशहरा की परंपरा और अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं, लेकिन वर्षों से लंबित मांग को लेकर अब केवल मौखिक आश्वासन पर भरोसा नहीं कर सकते। उनका कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिया जाता है, तो वे दशहरा में शामिल होने के लिए तैयार हैं। अन्यथा इस बार आयोजन में शामिल नहीं होने का निर्णय कायम रहेगा।

 

*परंपरा से जुड़े वादकों में मायूसी*

बस्तर दशहरा आदिवासी संस्कृति, आस्था और परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे में 30 मुंडा बाजा वादकों का आयोजन में शामिल होने से इनकार करना परंपरा से जुड़े इस विवाद को और महत्वपूर्ण बना रहा है।

वादकों ने दुख जताते हुए कहा कि वे वर्षों से अपनी पारंपरिक सेवाएं देते आए हैं, लेकिन मानदेय के मामले में उनकी मांग अब तक पूरी नहीं हुई। उनका कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें इस बार दशहरा से दूर रहने जैसा कदम उठाना पड़ रहा है।

 

*मनाने पहुंचे अधिकारी, फिर भी नहीं माने वादक*

मुंडा बाजा वादकों को मनाने के लिए एसडीएम और आरआई साहब भी पहुंचे, लेकिन उनकी समझाइश के बावजूद वादक अपने फैसले पर अडिग रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि छह साल से लंबित मानदेय की मांग पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वे बस्तर दशहरा में शामिल होंगे।

 

अब निगाहें जिला प्रशासन, दशहरा समिति और संबंधित जिम्मेदारों पर टिकी हैं कि वे वादकों की मांग पर क्या पहल करते हैं और क्या लिखित आश्वासन देकर उन्हें बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए तैयार कर पाते हैं।

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