मोहला— पांचवीं अनुसूची क्षेत्र मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में कथित निजी साहूकारी और ऊंची ब्याज दरों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मोहला में अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व) के समक्ष दिए गए दो अलग-अलग आवेदनों में एक महिला कर्जदाता के खिलाफ अत्यधिक ब्याज वसूली और कर्जदारों पर दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतों के मुताबिक जरूरत के समय छोटी रकम लेने वाले लोग ब्याज चुकाते-चुकाते कथित तौर पर कर्ज के ऐसे जाल में फंस रहे हैं, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।शिकायत में मोहला निवासी कल्पना गुप्ता, पति प्रतीक गुप्ता, गुप्ता दुकान, फव्वारा चौक का नाम सामने आया है। हालांकि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जांच की बात कही है।20 हजार लिए, हर सप्ताह 1 हजार ब्याज का आरोप पहली शिकायत में एक महिला ने बताया कि कपड़े के व्यवसाय के लिए करीब एक वर्ष पहले उसने 20 हजार रुपए उधार लिए थे। शिकायत के अनुसार इस रकम पर हर सप्ताह 1 हजार रुपए ब्याज तय किया गया। आवेदिका का दावा है कि लगातार ब्याज का भुगतान करने के बाद भी कर्ज का हिसाब समाप्त नहीं हुआ और अब भी मूलधन व ब्याज के नाम पर बड़ी रकम की मांग की जा रही है।शिकायतकर्ता के अनुसार ब्याज के रूप में करीब 50 हजार रुपए की मांग की जा रही है, जबकि उसके दावे के मुताबिक मूल रकम से दोगुने से अधिक राशि ब्याज के रूप में दी जा चुकी है।
खाली चेक और स्टाम्प पर हस्ताक्षर कराने का आरोप शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि रकम देते समय कथित रूप से खाली स्टाम्प पेपर और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक लिए जाते हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि भविष्य में रकम को लेकर विवाद होने पर इन दस्तावेजों का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जा सकता है यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल ऊंची ब्याज दर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कथित तौर पर दस्तावेजों के दुरुपयोग और दबावपूर्वक वसूली के पहलू की भी जांच जरूरी होगी।10 हजार के बदले हर सप्ताह 500 रुपए ब्याज का दावा दूसरी शिकायत में भी इसी तरह का आरोप सामने आया है। आवेदक के मुताबिक जरूरत के समय 10 हजार रुपए उधार लिए गए थे और इसके बदले हर सप्ताह 500 रुपए ब्याज लिया जा रहा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि लगातार ब्याज चुकाने के बावजूद कर्ज समाप्त नहीं हुआ। उसने यह भी बताया कि उसकी स्कूटी की आरसी बतौर गिरवी रखी गई है दोनों शिकायतों को साथ रखकर देखा जाए तो प्रशासन के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित लेनदेन कितने लोगों के साथ हुआ, कितनी रकम बांटी गई और कितनी राशि ब्याज के रूप में वसूल की गई 20 प्रतिशत मासिक ब्याज का आरोप, 240 प्रतिशत सालाना तक पहुंचता है हिसाब शिकायतकर्ता पक्ष ने करीब 20 प्रतिशत मासिक ब्याज वसूले जाने का आरोप लगाया है। साधारण गणना में यह दर सालाना 240 प्रतिशत तक पहुंचती है। हालांकि वास्तविक ब्याज दर और वसूली का स्वरूप प्रशासनिक जांच में दस्तावेजों तथा संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर ही स्पष्ट होगा।लेकिन यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो सवाल बेहद गंभीर है क्या मजबूरी में रकम लेने वाले लोगों को ब्याज के ऐसे जाल में फंसाया जा रहा था, जिसमें मूलधन चुकाने के बाद भी हिसाब खत्म नहीं होता?‘कर्ज’ या मजबूरी का कारोबार? जमीन तक बेचने की चर्चाएं क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ कर्जदार कथित तौर पर कर्ज चुकाने के लिए अपनी जमीन तक बेचने को मजबूर हुए। चिलमटोला निवासी के संबंध में भी जमीन बेचकर कर्ज चुकाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि निजी तौर पर ऊंची ब्याज दर पर रकम देने का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है तो अब तक कितने परिवार इस कथित कर्ज-जाल में फंस चुके हैं?क्या किसी के पास चेक हैं? क्या किसी के पास स्टाम्प पेपर हैं? कितने लोगों की जमीन या वाहन गिरवी रखे गए? कितनी रकम दी गई और कितनी वसूली गई? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में साहूकारी पर सवाल मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र से जुड़ा है और यहां आदिवासी हितों की सुरक्षा के लिए विशेष कानूनी व्यवस्था लागू है।ऐसे में प्रशासन को केवल दो शिकायतों तक सीमित रहने के बजाय यह भी जांचना होगा कि क्या क्षेत्र में कहीं और भी बिना वैध अनुमति निजी स्तर पर ब्याज का कारोबार संचालित हो रहा है?यदि कोई व्यक्ति वैधानिक अनुमति के बिना मनी लेंडिंग का कारोबार कर रहा है, तो संबंधित कानून के तहत कार्रवाई का प्रश्न उठता है। इसलिए शिकायतों की जांच में केवल कर्जदार और कर्जदाता के बीच हिसाब-किताब नहीं, बल्कि कथित साहूकारी की वैधता भी जांच का प्रमुख बिंदु होना चाहिए।ग्रामसभा को जानकारी तक नहीं!ग्राम पंचायत मोहला के सचिव कुबेर राम चोरिया ने बताया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र ग्राम पंचायत मोहला में साहूकार प्रथा को लेकर ग्रामसभा से किसी प्रकार की अनुमति या जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ब्याज पर निजी तौर पर पैसा दे रहा है तो उसकी वैधता की जांच आवश्यक है।एसडीएम बोले नोटिस देकर होगी जांच अनुविभागीय दंडाधिकारी मोहला हेमेंद्र भूआर्य ने शिकायतें प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए बताया कि संबंधित पक्ष को नोटिस तामील कराया गया है। मामले की जांच की जाएगी और जांच में तथ्य सामने आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी माना कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के कारण मामला गंभीर है।अब असली सवाल मोहला में कितने ‘सूद के जाल’ सक्रिय?दो शिकायतों ने प्रशासन के सामने सिर्फ एक कथित साहूकार का मामला नहीं रखा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में निजी साहूकारी की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।क्या यह सिर्फ दो कर्जदारों की कहानी है या फिर इसके पीछे निजी साहूकारी का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है?कितने लोगों से खाली चेक लिए गए हैं?कितने स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर कराए गए हैं?कितनों के वाहन या जमीन कथित तौर पर गिरवी हैं?और सबसे बड़ा सवाल—क्या पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में प्रशासन की नजरों से बचकर ब्याज का ऐसा कारोबार फल-फूल रहा है?अब निगाह प्रशासन की जांच पर है। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो कार्रवाई केवल एक मामले तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में निजी साहूकारी की जांच का रास्ता खोल सकती है।

