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*मोहला–स्कूलों में औचक निरीक्षण, सामने आईं खामियां; बीईओ ने दिए तत्काल सुधार के निर्देश*

मनीष कौशिक

मोहला—- विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार देवांगन ने शनिवार को विकासखंड मोहला के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों का औचक निरीक्षण कर स्कूलों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों, शिक्षकों की उपस्थिति और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत परखी। निरीक्षण के दौरान सीएसी वासडी रमेश कोर्राम एवं सीएसी मंडावीटोला ललित साहू भी साथ मौजूद रहे।बीईओ ने हाई स्कूल भोजटोला, प्राथमिक शाला अढ़ाई कट्टा, हाई स्कूल एवं पूर्व माध्यमिक शाला पाटन खास तथा वासडी पहुंचकर कक्षाओं में संचालित अध्यापन कार्य, विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति, शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालयीन व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण का फोकस समयबद्ध अध्यापन, अनुशासन, स्वच्छता, अधोसंरचना तथा शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर रहा।

प्रार्थना से लेकर अध्यापन तक, मिलीं कई खामियां

औचक निरीक्षण में कुछ विद्यालयों में प्रार्थना के समय सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति नहीं होने, कुछ शिक्षकों द्वारा अध्यापन डायरी का नियमित संधारण नहीं किए जाने तथा कुछ स्थानों पर साफ-सफाई की व्यवस्था कमजोर पाए जाने जैसी कमियां सामने आईं। इसके अलावा युक्तियुक्तकरण के निर्देशों के पालन में भी लापरवाही की स्थिति मिली।कमियों को गंभीरता से लेते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने संबंधित संस्था प्रमुखों एवं शिक्षकों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालयों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शैक्षणिक व्यवस्था को निर्धारित मापदंडों के अनुरूप व्यवस्थित रखना जरूरी है।

पोषक वाटिका और धान की खेती बनी आकर्षण का केंद्र

निरीक्षण के दौरान प्राथमिक शाला अढ़ाई कट्टा में शिक्षकों की पहल ने विशेष रूप से प्रभावित किया। स्कूल परिसर में बेहतर पोषक वाटिका विकसित करने के साथ ही खाली जमीन का सदुपयोग करते हुए धान की खेती भी की जा रही है। बीईओ ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों को पढ़ाई के साथ कृषि, पर्यावरण और पोषण से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अनुशासन पर जोर

विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार देवांगन ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला हैं। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समयबद्ध अध्यापन, शिक्षक उपस्थिति, अनुशासन, स्वच्छता और शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने संबंधित विद्यालयों को मिली कमियों को शीघ्र दूर कर बेहतर एवं अनुशासित शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के निर्देश दिए।

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