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*मोहला—सरपंचों का 15 दिन का आंदोलन समाप्त, 185 पंचायतों में लौटेंगे विकास कार्य; सरपंच संघ ने बताया जनता की जीत*

मनीष कौशिक

मोहला—- जिला पंचायत सीईओ भारती चंद्राकर के ट्रांसफर के साथ मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में पिछले 15 दिनों से जारी सरपंचों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। जिला और जनपद पंचायत की कार्यशैली से नाराज 185 सरपंचों ने अब अपने-अपने पंचायतों में लौटकर विकास कार्य शुरू करने का ऐलान किया है। वन विभाग के विश्राम गृह में आयोजित पत्रकार वार्ता में सरपंच संघ ने आंदोलन समाप्त करने की औपचारिक घोषणा करते हुए इसे जिले की जनता, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की जीत बताया।सरपंच संघ के अनुसार, जिले के 185 सरपंच बीते 15 दिनों से पंचायतों के विकास कार्यों में आ रही बाधाओं और जिला एवं जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली के विरोध में आंदोलन कर रहे थे। संघ का आरोप था कि प्रशासनिक व्यवस्था के कारण पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा था।इसी मांग को लेकर सरपंच संघ का प्रतिनिधिमंडल रायपुर पहुंचा था, जहां विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर जिला पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को हटाने की मांग रखी गई थी। इसके बाद जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ का तबादला होने पर सरपंच संघ ने इसे अपनी प्रमुख मांगों पर हुई कार्रवाई मानते हुए आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।वन विभाग के विश्राम गृह में आयोजित प्रेसवार्ता में सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अब सभी सरपंच अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में लौटकर रुके हुए विकास कार्यों को गति देंगे। उन्होंने शासन और जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में पंचायतों के अधिकारों का सम्मान किया जाएगा तथा विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।सरपंच संघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र भुआर्य ने कहा कि संघ ने शासन के समक्ष अपनी मांगें रखी थीं और सात दिनों का अल्टीमेटम दिया था। शासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद संघ ने निर्धारित समय का इंतजार किया। उन्होंने कहा कि शासन ने अपने आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई की है, जिससे सरपंच संघ संतुष्ट है। इसी कारण आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।सरपंच संघ का कहना है कि यह केवल सरपंचों की जीत नहीं, बल्कि जिले की सभी 185 ग्राम पंचायतों और वहां रहने वाले ग्रामीणों की जीत है। अब पंचायतों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और जनहित के कार्य प्राथमिकता के साथ पूरे किए जाएंगे।

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