कोयलीबेड़ा प्रतापपुर मार्ग पर आवागमन ठप पांचवे दिन भी चक्काजाम जारी ,,कोयलीबेडा़ से लक्ष्मण दर्रो रिपोर्ट*,,,
कोयलीबेडा / कोयलीबेडा़ विकसखण्ड के 18 पांचयत के 68 गांव के ग्रामीणों को चक्काजाम करने को मजबूर सुशासन के दावों की खुली पोल सड़कों पर उतरे आदिवासी
माओवाद प्रभावित और विकास से अछूते रहे इस क्षेत्र में आज भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार भले ही बस्तर में सुशासन और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आंदोलनकारियों का कहना है कि क्षेत्र के सांसद और विधायक उनकी लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
डिस्ट्रीक्ट मिनरल फंड (DMF) में बंदरबांट और बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) और सीएसआर (CSR) फंड की राशि का सही इस्तेमाल न करके उसमें भारी बंदरबांट की जा रही है। क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी है। इसके अलावा, जिला सहकारी बैंक कोयलीबेडा़ में ही हो कोयलीबेड़ा के ‘उत्कृष्ट विद्यालय’ (स्कूल) को पखांजूर शिफ्ट किए जाने के सरकारी फैसले का भी जनता द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है।
मुख्य मांग: कोयलीबेड़ा से ही संचालित हों सभी सरकारी कार्यालय
इस पूरे आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग यह है कि यदि विकासखंड का मुख्यालय कोयलीबेड़ा है, तो ब्लॉक स्तर के सभी कार्यालय के सारे सिस्टम लगाने की मांग सप्ताह के सातों दिन यहीं से संचालित होने चाहिए। वर्तमान में अधिकांश कार्यालयों का संचालन पखांजूर से किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
*(सांसद-विधायक)* और जिला प्रशासन के आला अधिकारी एक साथ बैठकर हमारी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते, तब तक हमारा यह आंदोलन और चक्काजाम यथावत जारी रहेगा।” — *बसंत ध्रुव, आदिवासी नेता*,,,,


