DMF की राशि का बंदरबांट कर अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से आदिवासी अंचल में गुणवत्ताहीन कार्य कराए जा रहे हैं।
जनपद में DMF की राशि से बड़ा खेल: 8.15 लाख के आयरन रिमूवल प्लांट की जगह पंचायतों में लगा 6×6 का डिब्बा, 4.075 लाख का भुगतान पहले ही
पटेली, लिमऊडीह, उकारी समेत 6 पंचायतों में जनवरी से स्वीकृत योजना का बुरा हाल, सूचना पटल तक नहीं लगा, जनपद अध्यक्ष ने दिए जांच के आदेश
डौंडी
आदिवासी विकासखंड डौंडी में जिला खनिज संस्थान न्यास मद यानी DMF की राशि के दुरुपयोग का एक और बड़ा मामला सामने आया है। नर्रालगुड़ा में सीसी रोड और ओपन जिम के बाद अब आयरन रिमूवल प्लांट की स्थापना में भारी अनियमितता उजागर हुई है।
जानिए क्या है पूरा मामला
जनपद पंचायत डौंडी के अंतर्गत पटेली, लिमऊडीह, उकारी, पचेड़ा, पथरटोला, सुडोनगर सहित करीब आधा दर्जन पंचायतों में जनवरी 2025 से आयरन रिमूवल प्लांट की स्थापना के लिए प्रति पंचायत 8.15 लाख रुपये की राशि DMF मद से स्वीकृत की गई थी।
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को आयरन युक्त पानी से निजात दिलाकर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था। लेकिन स्वीकृति के 15 महीने बाद भी जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है।उक्त कार्य में सामने आई खामियां:
पहला सिर्फ डिब्बा लगा, प्लांट गायब: जिन स्थानों पर आयरन रिमूवल प्लांट लगना था, वहां पर 8.15 लाख की योजना के नाम पर मात्र 6×6 फीट का एक लोहे का बॉक्स रखकर खानापूर्ति कर दी गई है।
दूसरा सूचना पटल नहीं: किसी भी पंचायत में कार्य स्थल पर सूचना पटल नहीं लगाया गया है। नियमानुसार कार्य का नाम, लागत, एजेंसी और समय-सीमा का उल्लेख होना अनिवार्य है, लेकिन यहां पूरी तरह गोपनीयता बरती गई।
तीसरा काम अधूरा, भुगतान पूरा: सबसे गंभीर बात यह है कि प्लांट चालू होना तो दूर, उसका ढांचा तक पूरा नहीं हुआ है। इसके बावजूद संबंधित पंचायतों द्वारा ठेकेदार को प्रति प्लांट 4.075 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है।
चौथा गुणवत्ता पर सवाल: जो 6×6 का बॉक्स लगाया गया है, उसकी गुणवत्ता और क्षमता पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। इतनी छोटी संरचना से पूरे गांव को आयरन मुक्त पानी मिलना संभव नहीं है।
जनपद अध्यक्ष ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए डौंडी जनपद पंचायत अध्यक्ष मुकेश कौड़ो ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा, “मेरे संज्ञान में यह मामला आया है। 8.15 लाख की योजना में सिर्फ डिब्बा लगा है और 4.075 लाख का भुगतान भी हो गया है, यह बेहद गंभीर है। इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और ग्रामीणों को उनका हक दिलाया जाएगा।”
ग्रामीणों के बीच उठ रहे हैं ये बड़े सवाल:
8.15 लाख रुपये की लागत वाले प्लांट की जगह 6×6 फीट का बॉक्स किसके आदेश पर लगाया गया? जब कार्य 20% भी पूरा नहीं हुआ तो ठेकेदार को 50% यानी 4.075 लाख रुपये का भुगतान किस नियम के तहत किया गया?
सूचना पटल न लगाकर योजना की जानकारी ग्रामीणों से क्यों छिपाई गई?
क्या प्राक्कलन के अनुरूप कार्य हुआ है? यदि हां, तो प्राक्कलन की प्रति पंचायत में क्यों उपलब्ध नहीं है?
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि DMF की राशि का बंदरबांट कर अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से आदिवासी अंचल में गुणवत्ताहीन कार्य कराए जा रहे हैं। नर्रालगुड़ा के बाद अब ये दूसरा बड़ा मामला है, जिससे DMF मद के कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए है
इस मामले में जनपद पंचायत डौंडी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) डी. डी. मंडले ने कहा कि —
“उक्त मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित पंचायतों से जानकारी मांगी गई है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार समुचित कार्यवाही की जाएगी।”
अब इस पूरे मामले में जांच के बाद आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की नजर बनी हुई है।



