*खाद-बीज, रसोई गैस और नेटवर्क की समस्या को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने खोला मोर्चा, अशोक तलांडी*,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,* बीजापुर जिले से दीपक मरकाम की खबर*
बीजापुर जिले के रूढ़ि जन्य परंपरागत सर्व आदिवासी समाज जिलाध्यक्ष बीजापुर अशोक कुमार तलांडी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि किसान अन्नदाताओं को समय पर खाद्य बीज नहीं देने से मजबूरन तेलंगाना आंध्र प्रदेश महाराष्ट्र से ऊंचे दामों में खाद्य बीज लेते हैं ,जबकि छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार कहती हैं कि राज्य के हर वर्ग को शासन की महत्व कांक्षी योजनाएं का लाभ नियमित दे रहे हैं यह सरासर झूठ है।
विष्णुदेव साय जी की सुशासन की सरकार को सोचने की आवश्यकता है कि कि समय पर किसानों को खाद्य बीज नहीं देने के स्थिति में यहां के किसान अन्नदाता अन्यत्र राज्यों से ऊंचे दामों में खाद्य बीज क्रय कर ला रहे हैं, इस खरीफ फसल सीजन में ऐसा न हो जितने भी पूर्व एवं वर्तमान पंजीकृत किसानों के मांग अनुरूप खाद्य बीज व किसानों से संबंधित योजनाओं का लाभ अविलंब पूरा किया जाए ।
तलांडी ने यह भी कहा राज्य व केंद्र सरकार एक ओर कहती हैं कि एक पेड़ मां के नाम पर ऐसा नहीं है केवल से केवल कारपोरेट जगत को लाभ पहुंचाने जल जंगल जमीन व लाखों हजारों पेड कटवा रही यह बताने की आवश्कता नहीं..
तलांडी ने यह भी कहा कि आवश्यकता अनुसार गांव गरीब माध्यम साक्षम लोगों को गैस सिलेंडर की भारी किल्लत है कि आज़ के दिनांक में रसोई गैस की आवश्यकता को जनता के मांग अनुरूप गैस सिलेंडर न देकर 45 दिनों में देने से तब तक क्या करेंगे वर्तमान में गैस सिलेंडर के अलावा दुसरा विकल्प नहीं पूर्व की तरह कैरोसिन मिट्टी तेल भी उपलब्ध होता तो स्टोव के माध्यम से पकवान बना सकते थे लेकिन राज्य व केंद्र सरकार के नाकामियों के वजह से खाद्य बीज के लिए किसान अन्नदाताओं व घरेलू गैस सिलेंडर के हितग्राही परेशान हैं ।
तलांडी ने सरकार को चेताते कहा कि गैस सिलेंडर 45 दिनों में दे पर विकल्प तो बता दें रसोई गैस के बगैर विकल्प के 45 दिनों की फरमान को वापस लिया जाकर रसोई गैस सिलेंडर हितग्राहियों को कम-से-कम 30 दिनों में गैस सिलेंडर दिया जाए, जबकि देश भर में विभिन्न राजनीतिक दलों व समाजिक संगठन आम जनता माता बहनें दिन ब दिन बढ़ती मंहगाई और खाद्य बीज गैस सिलेंडर के लिए कभी चक्का जाम तो कभी रैली आम सभा, नुक्कड़ सभा के माध्यम से मांग कर रहे हैं, राज्य व केंद्र सरकार को जूं तक नहीं रेंग रहा है। और तो और प्रारंभिक तौर पर जियो जियो जियो और जियो फाइबर के निर्माण से लोगों को नेटवर्क सुविधा बेहतर की बजाय जियो मर गया जैसे है। चुंकि हम जियो नेटवर्क के नियमित उपभोक्ता हैं पर जियो के बजाय मरने जैसे है।
आज जहां जियो टावर का निर्माण हुआ वहां लगभग जियो नेटवर्क के शत् प्रतिशत उपभोक्ता हैं जिन्होंने कूली भूती छोटे मोटे धंधा खेती किसानी कर एक विश्वास के साथ जियो को चुना और नियमित रिचार्ज करते हैं।
जियो नेटवर्क कि सुविधा बेहतर नहीं है कम से कम जियो नेटवर्क के मालिक को सोचना है कि लोग खून पसीना के मेहनत से प्रति दिन माह के हिसाब से नियमित रिचार्ज करते हैं। क्या जियो मालिक या कंपनी को बैगैर नेटवर्क के घर बैठे पैसे देना है।
भोपाल पटनम में तो जियो नेटवर्क का शर्मसार हैं।
कंपनी वालों को प्रति दिन फोन के माध्यम से शिकायतों का अंबार है।
शिकायतों का निराकरण का नाम ही नहीं जनता पसीना का पैसा है जरा जियो वाले मानवीय अनुरोध को समझिए जियो नेटवर्क कंपनी का छ ग राज्य के बीजापुर जिले के अंतर्गत जहां कहीं भी जियो टावर का निर्माण हुआ है वहां नेटवर्क नियमित सुविधा दिया जाए अन्यथा सर्व समाज उग्र आंदोलन करेगी जिसके जिम्मेदार शासन प्रशासन जियो नेटवर्क कंपनी की होगी ।






