मनीष कौशिक
मोहला–जिला मुख्यालय स्थित जिला सहकारिता बैंक की व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। बैंक में अपने ही खाते से पैसे निकालने के लिए किसानों और ग्रामीणों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह से ही बैंक के बाहर लंबी कतार लग जाती है, जहां अन्नदाता कड़ी धूप में अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई देते हैं सबसे हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े बैंक में आने वाले किसानों और ग्रामीणों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। बैंक परिसर में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, बैठने के लिए कुर्सियां या छांव की कोई सुविधा नहीं है और शौचालय तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बुजुर्ग, महिलाएं और दूर-दराज गांवों से आए किसान भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं ग्रामीणों का कहना है कि वे सुबह-सुबह अपने गांवों से बैंक पहुंचते हैं, लेकिन कई बार घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी काम नहीं हो पाता। कई किसानों को तो खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ता है। इससे किसानों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है किसानों का आरोप है कि जब इस अव्यवस्था को लेकर बैंक कर्मचारियों से शिकायत की जाती है तो कई बार उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और कर्मचारियों का व्यवहार भी रूखा रहता है। इससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है गौरतलब है कि यह स्थिति किसी दूरस्थ गांव की नहीं बल्कि जिला मुख्यालय में स्थित बैंक की है। ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि जब मुख्यालय के बैंक में ही अन्नदाताओं को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित अन्य बैंकों की स्थिति क्या होगी ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बैंक में जल्द से जल्द पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था, छांव और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अन्नदाताओं को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेते हैं और किसानों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल अन्नदाता अपनी ही कमाई के लिए धूप में भटकने को मजबूर हैं और व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं अन्नदाताओं की प्रमुख समस्याएं सुबह से बैंक के बाहर लंबी कतार कड़ी धूप में घंटों इंतजार करने की मजबूरी पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं बैठने और छांव की सुविधा का अभाव शौचालय तक उपलब्ध नहीं बड़ा सवाल जब जिला मुख्यालय के बैंक में ही यह हाल है, तो ग्रामीण इलाकों के बैंकों की हालत कैसी होगी ?






