बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी ने सादगीपूर्ण मनाई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती

जगदलपुर/बस्तर 

आज संभाग मुख्यालय राजीव भवन में बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी के द्वारा आजादी के महानायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती सादगीपूर्ण मनाई गई..इस दौरान कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया…

शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने पुष्पांजलि अर्पित कर कहा महात्मा गांधी जी”सत्याग्रह” और “अहिंसा” को जीवन का आधार मानते थे। आज गांधी जयंती न केवल एक राष्ट्रीय अवकाश है, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाने और उन पर अमल करने का भी अवसर है।स्वच्छता, सादगी, आत्मनिर्भरता और देशभक्ति गांधी जी के जीवन के प्रमुख संदेश थे। गांधीजी के विचारों ने न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में लोगों को प्रेरित किया।

वही भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका अडिग रही। 1921 से ही वे कांग्रेस से जुड़े और गांधीजी के नमक सत्याग्रह (1930) में सक्रिय भागीदारी की। ब्रिटिश जेलों में कुल नौ वर्ष बिताए, जहां उन्होंने पश्चिमी दार्शनिकों, क्रांतिकारियों और समाज सुधारकों की किताबें पढ़कर अपने विचारों को समृद्ध किया। जेल से बाहर आकर उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनकी देशभक्ति का प्रमाण यह था कि वे कभी पद या सत्ता के भूखे न रहे, बल्कि जनसेवा को अपना धर्म मानते थे।

ग्रामीण जिलाध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला ने कहा आज ही के दिन आजादी के महानायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का जन्म हुआ था और उन्होंने भारत की आज़ादी में अहम भूमिका निभाई थी। जिसे हम गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है और इसे अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी जाना जाता है। गांधीजी ने अपना जीवन भेदभाव मिटाने और देश को आज़ाद कराने के लिए समर्पित कर दिया। उनके कुछ प्रेरक नारे और शब्द आज भी देशभक्ति की प्रेरणा देते हैं।

प्रेमशंकर शुक्ला ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा लाल बहादुर शास्त्री जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने। उनका कार्यकाल मात्र 19 माह का था, लेकिन चुनौतियों से भरा रहा। 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ गया। सीमाओं पर सैनिकों की वीरता और खाद्य संकट के बीच शास्त्री जी ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया, जो आज भी प्रासंगिक है,इस नारे ने सेना का मनोबल बढ़ाया और किसानों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।युद्ध के दौरान उन्होंने गेहूं उत्पादन बढ़ाने के लिए हरित क्रांति की नींव रखी, उनका जीवन छोटे-छोटे कार्यों में भी नैतिकता और पारदर्शिता का प्रतीक था।

इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी सतपाल शर्मा,चंपा ठाकुर, नरेंद्र तिवारी,अंगद प्रशाद त्रिपाठी,गौरनाथ नाग,पार्षद सूर्या पानी,रविशंकर तिवारी,मोईन खान,अंजना नाग,एस नीला,सलीम जफ़र अली,शहज़ाद हुसैन,उस्मान रज़ा,राजेंद्र पटवा,लक्मण कर्तन,दुर्योधन कश्यप,मंगड़ू मरकाम,मोंटू मंडावी आदि मौजूद रहे..

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