
राहुल भोई महासमुंद……
पूरे देश सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश के हर जिलों मे भी हर्षोल्लास के साथ हरतालिका तीज का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। हिंदू रीतिरिवाजों के साथ महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की और अपने पति की लंबी आयु के लिए वरदान मांगा। महिलाओं ने परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना की। इस व्रत में सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए 24 घंटे का निर्जला उपवास रखा। भगवान शिव और माता पार्वती की शादी कराकर फुलेरा सजाया गया जहां महिलाओं ने रात्रि जागरण किया और भजन-कीर्तन के साथ शिव-पार्वती की आराधना की। इस दौरान भक्ति और पारिवारिक गानों पर महिलाएं देर रात तक भक्ति में लीन जमकर थिरकते रहीं। महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर नए परिधान धारण किए हुए थे। पूजा के दौरान भगवान को फल, फूल, मिठाइयां और वस्त्र अर्पित कर दान भी किया गया। नगर पुरोहित पंडित पंकज मिश्रा ने बताया कि, धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने मंदार पर्वत की कंदरा में सखियों के साथ कठोर तपस्या कर हरतालिका तीज व्रत किया था। जिसके बाद भगवान शिव प्रसन्न हुए और उनका विवाह संपन्न हुआ। तभी से यह व्रत परंपरागत रूप से मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि, इस व्रत के पालन से धन-धान्य, पुत्र रत्न और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसे सुहागिनों के लिए सर्वोत्तम व्रत माना गया है…।





