*भडारडिगी में ठाकुर देव और प्रकृति शक्तियों से अच्छी फसल की कामना की*
दुर्गूकोंदल | विकासखंड दुर्गूकोंदल आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जिसमें लगभग सभी गाँवों में आदिवासी सामुदाय के लोग निवासरत है और मूलनिवासी आदिवासी समाज प्रकृति पूजक माने जाते है वे ही प्रकृति को जानकर प्रकृति से सहयोग की भावना रखते हुए उनको याद करते है उसी परम्परा को निभाते हुए ग्राम पंचायत भडारडिगी में प्रकृति ही शक्ति मानते हुए गाँव के ठाकुर देव सहित सभी पेन शक्तियों की पूजा अर्चना कर गाँव में बिजली बनाने की प्रक्रिया से अच्छी फसल की कामना की, जिसमें समस्त ग्रामवासी गाँव के ठाकुर देव की पूजा अर्चना में शामिल हुए, अपने पूर्वजों के बताये नियमों अनुसार खेतो में अपनी फसलों का अच्छी उत्पादन होने की कामना प्रकृति शक्ति से की| हमारे प्रकृति शक्ति ठाकुर देवता की पूजा अर्चना की इसी दिन से खेती-किसानी के नए कामों की शुरुआत भी होती है, ग्राम गायता पटेल के द्वारा धान का बीज गांव के किसानों को अपने हाथों से वितरण करते हैं और धन बोयई का कार्य प्रारंभ करते हैं खेती किसानी में पानी का विशेष महत्व होता है, हमारी माटी जिसे हम माता भुइयां कहते हैं उसकी हम हमेशा रक्षा करेंगे, हमारी कृषि परंपरा में यह दिन विशेष महत्व रखता हैइनका जीवन कृषि पर आधारित है। ये लोग जंगलों को काटकर कृषि योग्य भूमि तैयार करते हैं, जिसमें परम्परागत रूप से कृषि कार्य करते हैं। विशेष रूप से मोटे अनाज मक्का, कोदो, कुटकी की खेती करते हैं। जनजातीय समाज द्वारा स्थानान्तरित कृषि व स्थायी कृषि कार्य दोनों ही प्रकार का किया जाता है। जिसमें मुख्य रूप से गाँव के ठाकुर देव की पूजा अर्चना करते है यह परम्परा पूर्वजों के ज़माने से होते आ रहीं है जिसमें प्रमुख रुप से ग्राम गायता परसूराम नरेटी, ग्राम पटेल मथुरा प्रसाद नरेटी, मानसिंह गावड़े,टिगेलराम नरेटी,मैनूराम नरेटी,धनेश नरेटी, अशोक कुमार नरेटी, गोकुल राम गावड़े,सहित समस्त ग्रामवासी शामिल रहे |

