सरायपाली – कोकड़ीवासियों के लिए पीड़ादायक होते हैं बारिश के दिन नाला पर पुल नहीं होने के कारण शहर व पंचायत से टूट जाता है संपर्क

सरायपाली ब्लॉक मुख्यालय से महज 4-5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत भीखापाली के अक्षित ग्राम कोकड़ी के निवासियों के लिए बरसात के तीन माह अत्यधिक पीड़ादायक होते हैं। गांव से शहर आने के मार्ग पर एक नाला है

जिसमें बरसात के समय पानी आने के कारण कोकड़ी के ग्रामीणों का शहर व स्वयं के ग्राम पंचायत से ही संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए शहर आना हो, या किसी मरीज को इलाज के लिए शहर लाना हो, उन्हें जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है। विगत कई वर्षों से यहां पुल की मांग कर रहे कोकड़ी के ग्रामीणों में शासन प्रशासन की अनदेखी को लेकर काफी आक्रोश देखा जा रहा है। शहर मुख्यालय से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम पंचायत भीखापाली स्थित है। इसी पंचायत के आश्रित ग्राम कोकड़ी की दूरी भी पंचायत से लगभग एक किलोमीटर है। दोनों के मध्य एक नाल पड़ता है, जिसमें बरसात के दिनों में पानी का बहाव होने पर दोनों गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। इसके अलावा कोकड़ी से सरायपाली की ओर आने के लिए भी यह एक प्रमुख मार्ग है, वो बरसात के दिनों में बंद हो जाता है। मजदूर विद्यार्थी कर्मचारी आदि कई लोगों को प्रतिदिन विभिन्न कार्यों से शहर अना पड़ता है, जिन्हें बरसात के दिने में अधिक परेशानी होती है। यदि आवश्यक हो तो ग्रामीणों को बहुत अधिक दूरी तय करके

दुसरे मार्ग से सरायपाली की ओर आना पड़ता है, लेकिन वह मार्ग भी बरसात में विशेष सुरक्षित नहीं है। यही कारण है कि किसी भी परिस्थिति में ग्रामीण इसी मार्ग का ही उपयोग करते है। सबसे अधिक परेशानी मिडिल हाई स्कूल पढ़ने वाले विद्यार्थियों को होती है, जो बरसात के समय में कई दिनों तक स्कूल आने से ही बंचित हो जाते है। नाला में पानी रहने पर कई बार स्कूली विद्यार्थि सहित ग्रामीणों को भी जान जोखिम में डाल कर नाला पार करना पड़ता है। वहीं गांव में किसी का स्वास्थ्य अधिक खराब होने पर उस व्यक्ति को इलाज के लिए खाट पर बैठाकर नाला पार करवाया जाता है। कोकड़ी के ग्रामीणों ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व नला पार कर आवागमन के लिए ग्रामीणों के प्रयास से ही छोटा रपटा बनाया गया था, लेकिन तेज बारिश आने पर वह बह गया उक्त नाले में रपटा पुल बनाने के लिए उनके द्वारा कई बार प्रशासन व जन प्रतिनिधियों में मांग की गई , लेकिन नतीजा शून्य ही रहा है।

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