महासमुंद मे स्कुल पर ताला जड़ कर पूर्व विधायक बैठे धरने पर

शासकीय प्राथमिक शाला खट्टी जो एक ऐतिहासिक महत्व वाला विद्यालय है उसे युक्तियुक्तकरण के तहत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में मर्ज किए जाने के विरोध में पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर स्कूल के सामने धरने पर बैठ गए हैं..पूर्व विधायक ने बताया कि ग्राम खट्टी के प्राथमिक शाला का स्थापना ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1814 में हुआ है। इस स्कूल से अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की। स्कूल स्थापना के बाद खट्टी सहित क्षेत्र के 40 ग्रामों के छात्र यहां अध्ययन करने आते थे। स्कूल की ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए 1999 में इस स्कूल का शताब्दी वर्ष मनाने के लिए शासन ने 50 हजार रुपए प्रदान किए थे। साथ ही इस स्कूल के ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए शासन ने इसे ऐतिहासिक धरोहर मानकर 4.95 लाख रुपए अनुदान स्वरूप प्रदान किया था। ताकि स्कूल का रखरखाव सुव्यवस्थित रूप से हो सके। ऐसे ऐतिहासिक स्कूल को किस आधार पर 2005 से शुरू हुए कन्या शाला के साथ मर्ज किया जा रहा है। दूसरी ओर प्राथमिक शाला में वर्तमान में 206 बच्चे अध्ययनरत हैं जबकि कन्या पूर्व माध्यमिक शाला में मात्र 115 बच्चे हैं। प्रशासन ने किस आधार पर इस शाला को मर्ज किया स्पष्ट करें। उन्होंने बताया कि  युक्तियुक्तकरण नियम के कंडिका क्रमांक 6 में स्पष्ट उल्लेख है कि किसी भी ऐतिहासिक, पुरातन मान्यताओं से जुड़े स्कूलों को मर्ज नहीं किया जाए। यह भाजपा सरकार के दोहरा चरित्र को दर्शाता है, इससे भाजपा सरकार की कथनी और करनी में फर्क स्पष्ट नजर आ रहा है। नियमों  की अनदेखी कर ऐतिहासिक स्कूल को मर्ज किया गया तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। सरकार की गलत नीति, मनमानीपूर्ण कार्रवाई, तानाशाही रवैए के विरोध में उग्र आंदोलन किया जाएगा। स्कूल के मुख्य दरवाजे के सामने बैठे पूर्व विधायक,  संजय शर्मा, दाऊलाल चंद्राकर, हीरा बंजारे,अमन चंद्राकर, ढेलू निषाद सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

शासन के नियमानुसार सही : बीईओ
प्राथमिक शाला में धरना-प्रदर्शन की सूचना पर बीईओ लीलाधर सिन्हा खट्टी पहुंचे। यहाँ उन्होंने पूर्व विधायक से चर्चा की। लेकिन , पूर्व विधायक द्वारा युक्तियुक्तकरण के तहत प्राथमिक शाला को मर्ज कराने का विरोध करते रहे और आदेश को वापस लेने की बात पर अडेÞ रहे। बीईओ सिन्हा ने कहा कि शासन की गाइड लाइन के अनुसार शाला का मर्ज किया वह सही है। फिर भी मामले को उच्चाधिकारियों से अवगत कराया जाएगा।

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