*दहशत के साए से बाहर निकलकर ,अंचल ने ओढ़ी नई उमंग की चादर, ‘उजर बस्तर’ अभियान से लिखी जा रही बदलाव की नई इबारत*,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,* बस्तर सम्भाग जगदलपुर हैडिंग से दीपक मरकाम की खबर*
*बंदूक की गूंज थमी, विकास की बढ़ी रफ्तार; सुशासन और जनविश्वास का नया मॉडल बना बस्तर*
जगदलपुर (बस्तर) दिनांक 19 मई 2026
जगदलपुर : कभी देश के नक्शे पर भय, दहशत और नक्सलवाद के साए के रूप में देखा जाने वाला बस्तर आज एक ऐतिहासिक करवट ले रहा है। दशकों का अंधकार अब छंट चुका है और बस्तर की वादियों में नई उमंग, नई ऊर्जा और अटूट आत्मविश्वास की नई सुबह हो चुकी है। कभी गोलियों की तड़तड़ाहट के लिए चर्चा में रहने वाला यह आदिवासी अंचल आज सुशासन, तीव्र विकास और अटूट जनविश्वास का देश में एक नया मॉडल बनकर उभर रहा है।
स्थानीय प्रशासन और जनता के बीच बढ़ते तालमेल ने विकास की राह को बेहद आसान बना दिया है। इसी नई उम्मीद, सकारात्मकता और विकसित बस्तर के संकल्प की सशक्त अभिव्यक्ति बनकर उभरा है— “उजर बस्तर”।
*बुनियादी सुविधाओं से बदल रही सूरत*
अधिकारियों के मुताबिक, बस्तर के उन सुदूर अंचलों तक भी अब विकास की किरणें पहुंच रही हैं, जो कभी पूरी तरह कटे हुए थे। अंदरूनी इलाकों में चमचमाती सड़कें, नए स्कूल, सुदृढ़ स्वास्थ्य केंद्र और हर घर तक पहुंचती बिजली इस बात का प्रमाण हैं कि बस्तर अब थमने वाला नहीं है। रोजगार के नए अवसरों ने स्थानीय युवाओं के हाथों को नई दिशा दी है, जिससे उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है।
‘*उजर बस्तर’ बना नई उम्मीदों का चेहरा*
जानकारों का मानना है कि “उजर बस्तर” महज़ एक अभियान या नारा नहीं है, बल्कि यह बस्तर के हर नागरिक के आत्मसम्मान और सुनहरे भविष्य का नया रोडमैप है। शासन की कल्याणकारी योजनाओं और सुशासन के प्रति जनता का बढ़ता भरोसा इस बात का गवाह है कि बस्तर अब खौफ के साए से पूरी तरह आज़ाद होकर देश के अग्रणी विकासशील क्षेत्रों में अपनी जगह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बदलाव का संदेश: बस्तर की पहचान अब हिंसा से नहीं, बल्कि यहां के नागरिकों के अटूट हौसले, सुशासन और चौतरफा विकास से हो रही है। ‘उजर बस्तर’ इसी बदलते और मुस्कुराते बस्तर की नई पहचान है।
