Wednesday, May 6, 2026

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बीजापुर में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य की हुई सफल शुरुआत, संग्राहक परिवारों को मिलेगा आर्थिक संबल,,,,,,, ,,,,,,,,,,,तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,

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बीजापुर में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य की हुई सफल शुरुआत, संग्राहक परिवारों को मिलेगा आर्थिक संबल,,,,,,,

,,,,,,,,,,,तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,

बीजापुर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, जिले में वनों पर आधारित आजीविका से जुड़े हजारों परिवारों के लिए एक सकारात्मक पहलू का आगाज हो गया है। इस वर्ष तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए निर्धारित 1,21,600 मानक बोरा के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित बीजापुर ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जहां पहले मई के प्रथम सप्ताह में यह कार्य प्रारंभ होता था, वहीं इस वर्ष मौसम की प्रतिकूलता, आंधी, तूफान और भारी वर्षा के कारण थोड़ी देरी हुई। लेकिन अब एक बार फिर संग्राहकों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

8 मई 2025 को बीजापुर में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य वनसंरक्षक एवं पदेन मुख्य महाप्रबंधक आर.सी. दुग्गा तथा कार्यकारी संचालक छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित रायपुर माणिवासगन एस. द्वारा जिला बीजापुर के प्रबंधकों, फड़ अभिरक्षकों, जोनल अधिकारियों और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को तेन्दूपत्ता तोड़ाई से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
बैठक में बताया गया कि तेन्दूपत्ता संग्रहण केवल वन आधारित आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण और वनवासी परिवारों को कई प्रकार की सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। राजमोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना, सामूहिक बीमा योजना, और छात्रवृत्ति योजना जैसे लाभ सीधे संग्राहक परिवारों को मिलते हैं। इससे न केवल आर्थिक सहायता प्राप्त होती है, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उनका भविष्य सुरक्षित होता है।
मुख्य निर्देशों के पालन में तेजी दिखाते हुए 9 मई 2025 से समिति बरदेला के संग्राहकों ने तेन्दूपत्ता तुड़ाई का कार्य प्रारंभ कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि ग्रामीण सरकारी योजनाओं और निर्देशों के प्रति सजग और जागरूक हो चुके है।
जिला प्रशासन और वन विभाग की सक्रिय भूमिका के चलते इस बार भी निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के साथ ही हजारों संग्राहक परिवारों को आर्थिक मजबूती और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। सभी संग्राहकों से अपील की गई है कि वे अधिकाधिक पत्तों का संग्रहण करें और निर्धारित फड़ों में समय पर जमा कर अपने मेहनत का समुचित लाभ प्राप्त करें।
यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगी बल्कि वन आधारित विकास की दिशा में एक सराहनीय कदम साबित होगी।

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