देश के सम्मान से बड़ा कोई संगठन नहीं हो सकता – समीर खान,प्रदेश सह संगठन मंत्री,आम आदमी पार्टी बस्तर जोन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जारी किए गए विशेष गैजेट में भारत के गौरव और अस्मिता के प्रतीक राष्ट्रध्वज तिरंगे को स्थान न देना न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि यह पूरे देशवासियों की भावनाओं का अपमान है।
आजादी के आंदोलन में भगत सिंह, अशफाकउल्ला खान, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस तिरंगे के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, उस तिरंगे को नजरअंदाज करना एक साधारण ‘डिज़ाइन चूक नहीं मानी जा सकती।
क्या यह सवाल उठाना ग़लत है कि
आखिर RSS को तिरंगे से क्या परहेज़ है?
क्या एक सदी पुराना संगठन आज भी तिरंगे को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर सका?
क्या ‘राष्ट्रभक्ति’ किसी विचारधारा की बपौती है?
इतिहास गवाह है कि जब पूरा देश आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब संघ के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार ने अपने स्वयंसेवकों को उस संघर्ष से दूर रहने को कहा।
2002 में भी जब नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराने की माँग उठी, तो संघ ने इसका विरोध किया और मामला अदालत तक पहुँच गया।
समीर खान, आम आदमी पार्टी बस्तर संभाग प्रभारी ने कहा तिरंगे की छाया में खड़ा होता है, किसी संगठन की विचारधारा की छाया में नहीं। तिरंगे का अपमान, देश के शहीदों का अपमान है। अगर संघ को आज भी तिरंगे से परहेज़ है, तो उन्हें यह बताना चाहिए कि राष्ट्र से ऊपर उनके लिए क्या है?”
आम आदमी पार्टी यह सवाल RSS प्रमुख मोहन भागवत जी से पूछना चाहती है:
जब आप 100 वर्ष पूरे होने की खुशी मना रहे हैं, तो क्या राष्ट्रध्वज की अनदेखी जानबूझकर की गई?
क्या यह संगठन अब भी अपने पुराने विचारों में जकड़ा हुआ है, जहाँ तिरंगे के लिए कोई जगह नहीं है?
और देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर खामोश क्यों है?
आज जब हर स्कूल, कॉलेज, सरकारी संस्था और आम नागरिक गर्व से तिरंगा लहराता है, तब RSS जैसे प्रभावशाली संगठन द्वारा उसे नजरअंदाज करना एक गहरी चिंता का विषय है”तिरंगे का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। यह देश की शान है, औरइसकी अनदेखी किसी भी संगठन को शोभा नहीं देती।”
आम आदमी पार्टी मांग करती है कि RSS इस विषय में स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब दे, और तिरंगे को उसके उचित सम्मान के साथ अपनी हर गतिविधि और प्रतीक में स्थान दे।

