तपती धूप में भी शिक्षा के प्रति समर्पण: दमपाया के बच्चे बने मिसाल, शहर के स्कूलों में उपस्थिति चिंता का विषय,,,,
,,,,,,,,,,,तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,,
भोपालपटनम। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,एक ओर जहां भीषण गर्मी और 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे शिक्षा के प्रति अद्भुत लगन और समर्पण का परिचय दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सभी सुविधाओं से युक्त शहरी स्कूलों में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।
भोपालपटनम ब्लॉक की ग्राम पंचायत दमपाया में संचालित प्राथमिक विद्यालय, जो टीन शेड के नीचे संचालित हो रहा है, वहां बच्चे तपती धूप और सीमित संसाधनों के बावजूद नियमित रूप से अध्ययन करते दिखाई दिए। विद्यालय में दर्ज 15 विद्यार्थियों में से 12 बच्चे उपस्थित रहे और पूरे उत्साह के साथ अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में पढ़ाई करते नजर आए। विद्यालय में मध्यान्ह भोजन का संचालन भी सुचारु रूप से होता पाया गया।
इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय एर्रागुफा में भी बच्चे पढ़ाई में जुटे हुए दिखाई दिए। ग्रामीण अंचल के इन विद्यालयों में भले ही शहरी क्षेत्रों जैसी सुविधाएं उपलब्ध न हों, लेकिन बच्चों और शिक्षकों की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता प्रेरणादायक है।
वहीं दूसरी ओर नगर क्षेत्र मद्देड़ में संचालित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय तथा शासकीय हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूल में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद अपेक्षित उपस्थिति नहीं देखी गई। हालांकि दोनों विद्यालयों के शिक्षक और कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर उपस्थित रहे और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में लगे रहे।
इस संबंध में मीडिया से चर्चा करते हुए स्वामी आत्मानंद विद्यालय के प्राचार्य श्रीनिवास कुमार जनगम ने बताया कि विद्यालय में वर्तमान में 371 विद्यार्थी दर्ज हैं तथा नए प्रवेश की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंधन लगातार विद्यार्थियों को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रहा है। उनका मानना है कि क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी भी विद्यार्थियों की कम उपस्थिति का एक प्रमुख कारण हो सकती है।
इसी प्रकार शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य पवन सोनी भी अपने समस्त कर्मचारियों के साथ विद्यालय में उपस्थित मिले। उन्होंने भी विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की बात कही।
क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी का असर जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक सड़कों पर भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम हलचल देखने को मिल रही है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विशेष रणनीति बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की उपस्थिति और शिक्षा के प्रति उनकी लगन यह संदेश देती है कि सीखने की इच्छा मजबूत हो तो परिस्थितियां बाधा नहीं बनतीं। वहीं शहरी विद्यालयों में कम उपस्थिति का विषय शिक्षा विभाग और प्रशासन के लिए चिंतन का विषय है।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि शासन और प्रशासन को क्षेत्र की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावी रूप से पहुंच सके।

