मौसम पूर्वानुमान प्रणाली की सटीकता को लेकर लोगों में गंभीर संदेह
जगदलपुर, बस्तर। पिछले कुछ समय से बस्तर, दंतेवाड़ा एवं सुकमा सहित आसपास के क्षेत्रों में मौसम विभाग एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा लगातार “अत्यंत गंभीर” (Extremely Severe) अलर्ट जारी किए जा रहे हैं। इन अलर्टों में तेज आंधी, बिजली गिरने, भारी वर्षा एवं अन्य आपदाजनक परिस्थितियों की चेतावनी दी जाती है। लेकिन जमीनी स्तर पर बार-बार ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है जिससे इन चेतावनियों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।
पब्लिक वॉइस के संयोजक रोहित सिंह आर्य ने कहा कि कई अवसरों पर अलर्ट तब जारी हुआ जब आंधी-तूफान और बारिश पहले ही गुजर चुके थे। वहीं अनेक बार “अत्यंत गंभीर” चेतावनी जारी होने के बावजूद न तो कोई विशेष मौसमीय घटना हुई और न ही वैसी परिस्थितियां निर्मित हुईं जैसा अलर्ट में बताया गया था। इससे आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
उन्होंने कहा कि चिंताजनक बात यह भी है कि कई बार तेज आंधी, तूफान और भारी बारिश जैसी घटनाएं घटित हो जाती हैं, लेकिन उससे पहले कोई प्रभावी चेतावनी या अलर्ट जनता तक नहीं पहुंचता। जबकि कई बार वास्तविक घटना न होने पर भी लगातार अलर्ट जारी किए जाते हैं। इस विरोधाभास ने लोगों के मन में मौसम पूर्वानुमान प्रणाली की सटीकता को लेकर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।
रोहित सिंह आर्य ने कहा कि वर्तमान स्थिति में मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यप्रणाली लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। कई नागरिक इन अलर्टों को लेकर मजाक करने लगे हैं और सोशल मीडिया पर भी इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि यदि जनता का भरोसा चेतावनी प्रणाली से उठ गया तो वास्तविक आपदा के समय भी लोग अलर्ट को नजरअंदाज कर सकते हैं, जिसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा के लिए समय पर चेतावनी जारी करना आवश्यक है, लेकिन चेतावनी का समय, उसकी सटीकता और विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बार-बार गलत या विलंबित अलर्ट जारी होना किसी भी आधुनिक आपदा प्रबंधन प्रणाली के लिए चिंतन का विषय होना चाहिए।
पब्लिक वॉइस मौसम विभाग एवं संबंधित एजेंसियों से मांग करता है कि—
बस्तर संभाग में जारी किए जा रहे अलर्टों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।
अलर्ट जारी करने के वैज्ञानिक मानदंड सार्वजनिक किए जाएं।
यह बताया जाए कि कितने अलर्ट वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप साबित हुए।
कई मामलों में आंधी-तूफान गुजर जाने के बाद अलर्ट जारी होने के कारणों को स्पष्ट किया जाए।
ऐसी तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाए जिससे जनता को समय पर और अधिक सटीक जानकारी मिल सके।रोहित सिंह आर्य ने कहा कि जनता को भयभीत करना नहीं, बल्कि सही समय पर सही जानकारी देकर सुरक्षित रखना शासन और प्रशासन का दायित्व है। मौसम संबंधी चेतावनियों की विश्वसनीयता बनाए रखना जनहित और जनसुरक्षा दोनों के लिए आवश्यक है।
पब्लिक वॉइस

