बस्तर में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता पर गंभीर प्रश्न:
आज दिनांक 31 मई 2026, ग्राम सदरापाल, ग्राम पंचायत पालेम, थाना तोंगपाल, जिला सुकमा से प्राप्त अत्यंत चिंताजनक घटना ने पूरे बस्तर को झकझोर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक आदिवासी ग्रामीण घर में शांतिपूर्वक प्रार्थना कर रहे लोगों पर हिंसक हमला किया गया। यदि यह तथ्य सत्य हैं, तो यह केवल कुछ व्यक्तियों पर हमला नहीं, बल्कि भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपनी अंतरात्मा की स्वतंत्रता तथा किसी भी धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। यदि किसी व्यक्ति को केवल उसके धार्मिक विश्वास के कारण सामाजिक बहिष्कार, मारपीट, धमकी या हिंसा का सामना करना पड़ रहा है, तो यह संविधान, विधि के शासन और मानवाधिकारों की मूल भावना का खुला उल्लंघन है।
सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि आखिर बस्तर में ऐसी परिस्थितियाँ क्यों निर्मित की जा रही हैं जहाँ
– गांवों में भाईचारा टूट रहा है,
– परिवारों के बीच विभाजन बढ़ रहा है,
– और विकास के मूल मुद्दों को पीछे धकेलकर धार्मिक तनाव को हवा दी जा रही है?
बस्तर आज जिन वास्तविक चुनौतियों से जूझ रहा है, वे हैं —
जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा, खनिज संपदा पर स्थानीय अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, संचार, युवाओं के अवसर और आदिवासी स्वाभिमान की रक्षा।
यह अत्यंत चिंता का विषय है कि इन मूलभूत प्रश्नों पर गंभीर जनसंवाद और संघर्ष के बजाय कुछ शक्तियाँ गांव-गांव तक पहुँचकर धर्म और पहचान के नाम पर विभाजन की रेखाएँ खींच रही हैं।
प्रश्न यह उठता है कि:
जब बस्तर के संसाधनों की रक्षा की बात होती है तो ये संगठन मौन क्यों हो जाते हैं?
जब शिक्षा और स्वास्थ्य की दुर्दशा पर आवाज़ उठानी होती है तो ये सक्रिय क्यों नहीं दिखते?
क्यों केवल धर्म आधारित ध्रुवीकरण को ही सामाजिक जागरण का नाम दिया जा रहा है?
यह बस्तर की परंपरा नहीं है।
बस्तर की पहचान सदियों से सह-अस्तित्व, विविधता, सहिष्णुता और सामुदायिक सौहार्द रही है।
देश की आज़ादी से लेकर लंबे समय तक बस्तर ने अनेक चुनौतियाँ देखीं, लेकिन आज जिस प्रकार धार्मिक आधार पर सामाजिक तनाव और भय का वातावरण निर्मित हो रहा है, वह अत्यंत खतरनाक संकेत है।
हम छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से स्पष्ट प्रश्न पूछते हैं:
1. क्या बस्तर में प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं?
2. क्या अनुच्छेद 25 ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी रूप से लागू है?
3. ऐसे मामलों में त्वरित निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं होती?
4. पर्दे के पीछे कार्यरत उन तत्वों की पहचान कब होगी जो समाज को बाँटने का कार्य कर रहे हैं?
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की मांगें:
1. घटना की न्यायिक/स्वतंत्र जांच
2. दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी
3. पीड़ितों की सुरक्षा और उपचार
4. धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी का कड़ाई से पालन
5. बस्तर में सामाजिक सौहार्द हेतु सर्वधर्म शांति संवाद
हम स्पष्ट कहना चाहते हैं —
बस्तर को नक्सलवाद से धर्मवाद की ओर धकेलने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बस्तर को चाहिए
विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और संवैधानिक न्याय;
न कि भय, विभाजन और नफरत।
आज आवश्यकता है कि सभी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन, प्रशासन और जागरूक नागरिक वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर शांति, न्याय और संविधान की रक्षा के लिए आगे आएँ।
बस्तर का भविष्य धार्मिक संघर्ष नहीं, संवैधानिक सह-अस्तित्व में है।
जारीकर्ता:
नवनीत चाँद
मुख्य संयोजक — बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा
बस्तर संभाग अध्यक्ष — जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)



