*मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान बना जीवनदायी पहल ,डोडी तुमनार (कुयेम गुमपुर) में पहुंचे जिला स्तरीय अधिकारी, गंभीर मरीज सोमलू को मिला नया जीवन*दीपक मरकाम की खबर,
बीजापुर, 04 जून 2026
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान-2026 के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को जिले के अतिदुर्गम एवं पहुंचविहीन क्षेत्रों तक पहुंचाने के उद्देश्य से 15 मई 2026 को विकासखंड बीजापुर के अंतर्गत डोडी तुमनार (कुयेम गमपुर) में विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। यह क्षेत्र लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। अभियान के तहत पहली बार जिला स्तर के अधिकारी स्वयं गांव पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी एवं संचालन में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के सफल संचालन एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कलेक्टर बीजापुर श्री विश्वदीप तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बीजापुर श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन एवं सतत निगरानी में जिले के दूरस्थ एवं पहुंचविहीन क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
शिविर के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.आर. पुजारी स्वयं स्वास्थ्य दल के साथ डोडी तुमनार (कुयेम गमपुर) पहुंचे। स्वास्थ्य जांच दल द्वारा ग्रामीणों की व्यापक स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें रक्तचाप, शुगर, गर्भवती माताओं की जांच, शिशुओं का टीकाकरण, टीबी एवं कुष्ठ रोग के संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग तथा अन्य सामान्य एवं गंभीर बीमारियों का उपचार किया गया। गंभीर रोगों से ग्रसित मरीजों को तत्काल एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराते हुए जिला चिकित्सालय बीजापुर रेफर किया गया।
इसी शिविर के दौरान डोड़ी तुमनार निवासी 10 वर्षीय सोमलू मोड़ियम की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की पहचान की गई। जांच के दौरान पाया गया कि बच्चा नेफ्रोटिक सिंड्रोम, मलेरिया एवं मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित था तथा उसके पूरे शरीर में अत्यधिक सूजन थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.आर. पुजारी द्वारा तत्काल एंबुलेंस के माध्यम से उसे जिला चिकित्सालय बीजापुर रेफर कराया गया।
जिला चिकित्सालय बीजापुर पहुंचने पर सोमलू की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। बच्चे को नेफ्रोटिक सिंड्रोम, मलेरिया, मिर्गी के दौरे, पूरे शरीर में अत्यधिक सूजन, पेट में अत्यधिक पानी भरने तथा सांस लेने में गंभीर तकलीफ जैसी जटिल समस्याएं थीं। 10 वर्ष की आयु में उसका वजन 50 किलोग्राम तक पहुंच गया था। पेट में जमा पानी फेफड़ों पर दबाव बना रहा था, जिससे उसकी सांस लेने की समस्या लगातार बढ़ रही थी। स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल आईसीयू में भर्ती कर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया।
सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के मार्गदर्शन में शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में चिकित्सा अधिकारी डॉ. निखिल, डॉ. आसिफा, डॉ. मनी, डॉ. हर्षवर्धन एवं डॉ. प्रशांत की टीम द्वारा बच्चे का गहन उपचार किया गया। उपचार के दौरान शिशुरोग विभाग एवं नर्सिंग स्टाफ द्वारा 24 घंटे निगरानी और देखभाल सुनिश्चित की गई।
चिकित्सकीय टीम द्वारा नेफ्रोटिक सिंड्रोम के उपचार हेतु स्टेरॉयड थेरेपी, एल्ब्यूमिन एवं डाइयुरेटिक्स दिए गए, जिससे शरीर में जमा अतिरिक्त द्रव और सूजन को नियंत्रित किया जा सका। मलेरिया संक्रमण के उपचार के लिए एंटी-मलेरियल दवाएं तथा मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने के लिए एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं दी गईं। सांस लेने में परेशानी को देखते हुए ऑक्सीजन थेरेपी प्रदान की गई और बच्चे को लगातार उच्च प्रोटीन युक्त आहार पर रखा गया। उपचार अवधि के दौरान फ्लूइड बैलेंस, ऑक्सीजन स्तर, वजन एवं अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों की नियमित निगरानी की गई।
लगातार 17 दिनों तक चले गहन उपचार और चिकित्सकीय देखभाल के परिणामस्वरूप बच्चे की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। उसके शरीर की सूजन समाप्त हो गई, पेट में भरा पानी सूख गया, सांस सामान्य हो गई तथा स्वास्थ्य में लगातार सुधार दर्ज किया गया। 01 जून 2026 को जब सोमलू को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया, तब उसका वजन 50 किलोग्राम से घटकर 28 किलोग्राम रह गया था। लगभग 22 किलोग्राम अतिरिक्त सूजन एवं शरीर में जमा द्रव सफलतापूर्वक कम किया गया।
यह सफलता मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के सकारात्मक प्रभाव का प्रत्यक्ष उदाहरण है। यदि डोड़ी तुमनार जैसे दूरस्थ क्षेत्र में आयोजित शिविर के दौरान सोमलू की समय पर पहचान नहीं होती और उसे तत्काल जिला चिकित्सालय रेफर नहीं किया जाता, तो उसकी स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी। अभियान के माध्यम से न केवल स्वास्थ्य जांच की जा रही है, बल्कि गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
अस्पताल से छुट्टी के समय सोमलू के परिजनों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। यह उपलब्धि जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, जिला चिकित्सालय बीजापुर की चिकित्सकीय टीम तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के समन्वित प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने एक दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र के गंभीर रूप से बीमार बच्चे को समय पर उपचार उपलब्ध कराकर नया जीवन प्रदान किया।



