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*नक्सलियों का डर खत्म हुआ, लेकिन विकास अब भी नहीं पहुंचा ,बीजापुर जिले के सीमावर्ती गांव के ग्रामीण आज भी सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार सुविधाओं से वंचित, 52 किमी का सफर तय कर पहुंचते हैं ब्लॉक मुख्यालय”* दीपक मरकाम की खबर 

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*नक्सलियों का डर खत्म हुआ, लेकिन विकास अब भी नहीं पहुंचा ,बीजापुर जिले के सीमावर्ती गांव के ग्रामीण आज भी सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार सुविधाओं से वंचित, 52 किमी का सफर तय कर पहुंचते हैं ब्लॉक मुख्यालय”* दीपक मरकाम की खबर

 

*”विकास की राह देख रहा कोत्तापल्ली: आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार”*

बीजापुर दिनांक 31 मई 2026

बीजापुर जिले का बोर्डर सीमावर्ती इलाक में आजादी के अब तक उस गांव के लिए सरकार ने पहुंच मार्ग नहीं बना पाया है.,

अलांकि यहां मार्ग एनएच पुरानी है जो सीधे तेलंगाना को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क है। कई सरकारें आईं और गईं अब छग भी नक्सलमुक्त भारत हो चुका है, पहले नक्सलियों का भय हुआ करता था।

 

कोत्तापल्ली गांव का नाम भी आप ने सुना भी होगा जी हां वो गांव कोत्तापल्ली है जो उसुर ब्लाक ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर बीजापुर जिले का आश्रित गांव है।

 

सरकारी काम-काज हेतु कोत्तापल्ली ग्रामीणों को 52 किमी का सफर तय करना पड़ता है जो बारिश के दिनों नदी नाले उफान पर होते है तब भी अपनी जान को जोखिम में डालकर ऐसे कठीन वक्त में सरकारी कार्यों को लिए ब्लाक मुख्यालय आवापल्ली आने मजबूर होना पड़ता है कोत्तापल्ली ग्रामीणों को।

 

कोत्तापल्ली गांव के लोग का हाल चाल जानने आज तक के न कोई प्राशासनिक अधिकारी गया ना को राजनीतिक दल का कोई नेता नहीं पहुंचा आज तक का। पहली बार एक शिविर हुई 25 मार्च 2017 को। अब तो छत्तीसगढ़ बस्तर नक्सली मुक्त हो चुका है।

 

मूलभूत सारी सुविधाएं उसे वंचित हैं ग्रामीण, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क, नेटवर्क कनेक्टिविटी आदि से वंचित है।

 

छग सरकार ने तो सड़क उसुर से सीधे तेलंगाना के पुसगुप्फा को जोड़ दिया है। पर भीमाराम और रायपुरम के बीच एक की पाइंट होता है वहीं से कोत्तापल्ली कि पहुंच मार्ग है वहां से लगभग 20-25 किमी है जो आज तक नहीं बनी है नदी नाले पथरीली है जिस सड़क से ग्रामीण आने जाने को मजबूर हैं कोत्तापल्ली के ग्रामीणों।

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