अमित शाह के दौरे के बीच सर्व आदिवासी समाज ने उठाए बस्तर विकास मॉडल पर सवाल,,,,,,,,,
,,,,,,,,,,,,,,तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,
मुलाकात नहीं होने पर प्रेस नोट जारी कर रखीं मांगें, जल-जंगल-जमीन और ग्रामसभा अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
बीजापुर।,,,,,,,,,, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे के बीच सर्व आदिवासी समाज, बस्तर संभाग ने प्रेस नोट जारी कर बस्तर विकास मॉडल को लेकर अपनी चिंता और मांगें सार्वजनिक की हैं। समाज ने कहा कि गृह मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो पाने के कारण बस्तर की जनता की भावनाओं और सुझावों को प्रेस नोट के माध्यम से सामने रखा जा रहा है।
सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया कि बस्तर में विकास की कोई भी प्रक्रिया स्थानीय आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप तथा ग्रामसभा की सहमति के आधार पर संचालित होनी चाहिए। समाज का कहना है कि ऐसा कोई भी विकास स्वीकार्य नहीं होगा जिससे स्थानीय लोगों का विस्थापन हो, प्राकृतिक संसाधनों पर उनका नियंत्रण समाप्त हो या सामाजिक-सांस्कृतिक असंतुलन पैदा हो।
*“विकास के नाम पर स्थानीय अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं”*
सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि बस्तर लंबे समय से संघर्ष और हिंसा का दंश झेलता आया है। ऐसे में शांति और विकास आवश्यक है, लेकिन विकास के नाम पर स्थानीय समाज के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
*निजी खनन, बोधघाट और नए कैंपों का विरोध*
समाज ने अपनी मांगों में लौह अयस्क उत्खनन परियोजनाओं में निजी कंपनियों की भागीदारी समाप्त करने, बोधघाट एवं नदी जोड़ो परियोजनाओं को निरस्त करने, आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को पट्टे पर देने संबंधी प्रावधान समाप्त करने तथा अबूझमाड़ क्षेत्र में नए सैन्य एवं अर्द्धसैनिक शिविर स्थापित नहीं करने की मांग उठाई है।
इसके अलावा स्थानीय युवाओं को शासकीय सेवाओं और परियोजनाओं में प्राथमिकता देने, नियमित स्कूलों एवं महाविद्यालयों को मजबूत करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में शिक्षा की विशेष व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है।
*पेसा और वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग*
सर्व आदिवासी समाज ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग करते हुए सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को प्राथमिकता देने की बात कही है। साथ ही जिला खनिज न्यास की राशि का हिस्सा सीधे ग्रामसभाओं एवं पंचायतों को देने तथा बैलाडीला एवं नगरनार जैसी परियोजनाओं में प्रभावित स्थानीय लोगों को हिस्सेदार बनाए जाने की मांग भी रखी गई है।
*जगदलपुर सीट को पुनः एसटी आरक्षित करने की मांग*
समाज ने परिसीमन प्रक्रिया में जगदलपुर विधानसभा सीट को पुनः अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित करने, स्थानीय भाषा-संस्कृति एवं पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के संरक्षण के लिए विशेष नीति बनाने तथा वन विभाग द्वारा व्यावसायिक पेड़ कटाई पर रोक लगाने की मांग भी दोहराई है।
प्रकाश ठाकुर ने कहा कि बस्तर का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब यहां विकास के साथ-साथ आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
