भेलवापानी डंडाईखेडा सहित तमाम जगह रेत माफिया का आतंक, नदियों का सीना चीरकर खुलेआम हो रही तस्करी; प्रशासन मौन…..रिपोर्टर:-विरेन्द्र कुमार रावटे।।
कांकेर:-
उत्तर बस्तर कांकेर के दुर्गकोंडल, दंडाईखेड़ा भेलवापनी ,चारामा और कांकेर ब्लॉक में इन दिनों रेत का अवैध कारोबार अपनी चरम सीमा पर है। राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक मिलीभगत के चलते रेत माफिया ने क्षेत्र की नदियों को तबाह करना शुरू कर दिया है। हजारों की संख्या में हाइवा प्रतिदिन रायपुर, भिलाई और पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र भेजे जा रहे हैं, जिससे न केवल पर्यावरण को क्षति पहुँच रही है, बल्कि शासन को करोड़ों के राजस्व का चूना भी लग रहा है।*
*दिखावे की लीज, खेल कहीं और का*
स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि रेत माफिया के पास लीज और रॉयल्टी की पर्चियां तो होती हैं, लेकिन वे महज़ दिखावे के लिए हैं। वास्तविकता यह है कि लीज कहीं की, खनन कहीं और: जिस घाट की लीज आवंटित है, वहां के बजाय माफिया उन जगहों से रेत निकाल रहे हैं जहां खनन प्रतिबंधित है।
फर्जी रॉयल्टी: रॉयल्टी पर्चियां दूसरे जिलों या अन्य घाटों की इस्तेमाल की जा रही हैं।
खनिज विभाग पर सांठगांठ के आरोप: आरोप है कि खनिज विभाग के अधिकारी इस पूरे खेल में शामिल हैं और मोटी कमीशन लेकर अवैध उत्खनन को अपनी मूक सहमति दे रहे हैं।
बर्बाद हो रही पीएमजीएसवाई (PMGSY) सड़कें
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कें, जो हल्के वाहनों के लिए डिजाइन की गई हैं, आज रेत से लदे 60 से 70 टन के भारी-भरकम हाइवा के नीचे दबकर दम तोड़ रही हैं। इन सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और ग्रामीणों का चलना दूभर हो गया है।
विरोध करने पर ‘फर्जी केस’ और धमकियां
इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और ग्रामीणों को दबाने के लिए माफिया दमनकारी नीति अपना रहा है।
“अगर कोई विरोध करता है, तो उसे भाजपा-कांग्रेस के रसूखदार नेताओं का डर दिखाया जाता है। इतना ही नहीं, विरोध करने वालों के खिलाफ फर्जी शिकायतें दर्ज कराकर उन्हें बदनाम करने और डराने का प्रयास किया जा रहा है।”
— स्थानीय निवासी
गांवों में गुटबाजी और अशांति
रेत माफिया ने अपने स्वार्थ के लिए शांत गांवों में गुटबाजी पैदा कर दी है। पैसों के लालच में कुछ लोगों को अपने पाले में लेकर ग्रामीणों के बीच ही विवाद और उपद्रव कराया जा रहा है, जिससे सामाजिक ताना-बाना बिखर रहा है।
*प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग*
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क्षेत्र की जनता और निष्पक्ष जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध उत्खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
भारी वाहनों के प्रवेश से ग्रामीण सड़कों को बचाया जाए।
लीज और रॉयल्टी की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और माफियाओं पर एफआईआर दर्ज की जाए।
यदि प्रशासन समय रहते नहीं चेता, तो नदियों के तटीय कटाव और पर्यावरण असंतुलन के कारण भविष्य में क्षेत्र को गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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