*खनिज से लेकर पर्यटन तक—आदिवासी हक पर कब्जा नहीं चलेगा: ठेकेदारी हटाओ, रूढ़ि जन्य परंपरागत ग्राम सभा/ग्राम पंचायत को सौंपो अधिकार –अशोक तलांडी , *,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,* बीजापुर जिले से दीपक मरकाम की खबर*
बीजापुर दिनांक, 12/04/2026
बीजापुर जिले से अशोक कुमार तलांडी रूढ़ि जन्य परंपरागत सर्व आदिवासी समाज जिलाध्यक्ष ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि हाल ही प्राकृतिक संसाधनों को लेकर पक्ष विपक्ष के द्वारा तु तु मैं मैं हो रहे हैं तलांडी ने कहा कि यह गौण खनिज के संदर्भ में भारतीय संविधान के आर्टिकल 13 (3) क 244 के तहत सभी बातों का समावेश है कि अनूसूचित क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का किसी भी सूरत में व्यक्तिगत ठेकेदार को लीज में नहीं देना चाहिए यदि सरकारें ग्रामीण विकास की परिकल्पना चाहती है तो आदिवासी बहुल इलाकों में जितने भी प्राकृतिक संसाधन है कभी भी लीज या व्यक्तिगत ठेकेदार को देना अनूचित है।एक ओर सरकारें कहती है कि ग्रामीणों का विकास फिर हमारे अमूल्य संसाधनों को सरकारें ठेकेदारों को देना सरा सर गलत है।
तलांडी ने आगे कहा कि जिले में जितने भी पर्यटन स्थल व पेन गुड़िया,पेन करसाड आयोजन होता ऐसे धार्मिक स्थलों के भूमि का पट्टा,चार दीवारी, आवागमन सुलभ हेतु सड़क, बिजली, रोशनी के लिए हाई मास्क का निर्माण किया जाए तथा विगत लंबे अरसे से विभिन्न विभागों में पदस्थ स्वीपर, रसोईया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका, मितानिन, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों पुलिस विभाग के प्राकृतिक आपदा बाढ, आगजनी जैसे को नियंत्रित करने वाले नगर सैनिकों को भी नियमित करते हुए समान कार्य समान वेतन दिया जाए।तलांडी यह कहा कि वर्ष 2003 में अनूसूचित क्षेत्रों के मूल निवासियों को शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से जिस भी गांव के नाम से स्कूल, आश्रम,पोटा केबिन स्वीकृत है कुछ अराजकता के कारण उन स्कूलों आश्रम, छात्रावासों ,पोटा केबिन आवासीय संस्थानों को विस्थापित कर कर अन्यत्र स्थानों पर वर्तमान में संचालित कर रहे हैं।
रुढ़ि जन्य परंपरागत सर्व आदिवासी समाज बीजापुर का मांग है। जितने भी स्कूल, आश्रम, छात्रावास, आवासीय पोटा केबिनों को पूर्व में स्वीकृत यथा स्थान में संचालित किए जाने से उस गांव व वहां के बच्चों का रौनक बढ़ेगी अच्छा प्रतिसाद मिलेगा और इस वर्ष छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर महाराष्ट्र सीमा के प्रचलित गांव मट्टीमरका में शासन प्रशासन द्वारा रीवर एडवेंचर कार्यक्रम आयोजित कर लोगों का दिल जीत लिया हमारे जिले में प्राकृतिक संसाधनों पर्यटन स्थलों की कमी नहीं है ।
तलांडी ने कहा कि ऐसे पुनीत कार्यक्रमों में शासन प्रशासन द्वारा राशि इन्वेस्ट किया जाता है सार्वजनिक हो और मट्टीमरका जीतम गंडी के नाम से विख्यात है कि एक कहावत को चरितार्थ करता है कि इंटरनेशनल लांघ जंपर लंबी कूद के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी वह जीतम गंडी को लंबी कूद के माध्यम से पार कर सकता है तो स्वाभाविक है जीतम गंडी का उच्च स्तरीय तकनीकी प्राक्कलन अनुसार निर्माण किया जाकर विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल बनाया जाए और छ ग के अंतिम छोर मट्टीमरका महाराष्ट्र के अंतिम छोर बीराड घाट में इंद्रावती नदी में पुलिया निर्माण किये जाने से ब्रिटिश शासन काल के राजधानी नागपुर की दूरी लगभग 100 किलोमीटर कम पड़ेगी और महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश उड़ीसा, और आस पास के राज्य के राहगीरों को आवाज की सुविधा आसानी से उपलब्ध होगी ।
तलांडी ने कहा कि किसी भी सूरत में गौण खनिज को ठेकेदारों को नहीं दे रूढ़ि जन्य परंपरागत ग्राम सभा या ग्राम पंचायत को हैण्ड ओवर करें ताकि ग्रामीण विकास की परिकल्पना परिभाषित हो रुढ़ि जन्य परंपरागत ग्राम सभा व ग्राम पंचायत का आय श्रोत में वृद्धि के साथ मूल भूत आवश्यकताएं पूरा हो सके ।
तलांडी यह भी कहा कि आदिवासी बहुल बीजापुर जिले के अंतर्गत तहसील गंगालूर मुख्यालय में विभिन्न पंचायतों के आम नागरिकों को नियद नेल्ला नार के योजना के तहत् पेट्रोल पंप का स्थापना किया जाकर वहां के लोगों को डीजल पेट्रोल भी उपलब्ध कराये ताकि वहां के लोगों को 25 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय बीजापुर नहीं आना पड़े यानी मावा नाटे मावा राज जहां के लोगों को वहीं सुविधा मिले






