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प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल भोंगापाल मे 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर आस्था भक्ति और श्रद्धालुओं का संगम का आयोजन*,,,

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*प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल भोंगापाल मे 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर आस्था भक्ति और श्रद्धालुओं का संगम का आयोजन*

राजमन नाग

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक में स्थित ऐतिहासिक भोंगापाल में महाशिवरात्रि पर आस्था, भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ 5-6वीं शताब्दी के पुरातात्विक महत्व वाले बौद्ध चैत्यगृह और शिव मंदिर के अवशेष मौजूद हैं, जहाँ स्थानीय लोग बुद्ध की प्रतिमा को ‘डोकरा बाबा’ के रूप में पूजते हैं। यह स्थल बस्तर क्षेत्र में अपनी विशिष्ट बौद्ध विरासत के लिए जाना जाता है।
भोंगापाल महाशिवरात्रि आयोजन की मुख्य विशेषताएं:
सांस्कृतिक संगम: भोंगापाल में मिले पुरातात्विक साक्ष्यों में ईंटों से बना प्राचीन चैत्यगृह शामिल है। यहाँ भगवान शिव और बुद्ध की प्रतिमाओं के साथ आस्था का संगम देखने को मिलता है, जहाँ लोग डोकरा बाबा और शिव जी के दर्शन करते हैं।
ऐतिहासिक महत्व: भोंगापाल के पास तमोरा नदी के तट पर स्थित यह स्थल 6वीं शताब्दी में नलवंश के शासकों द्वारा विकसित माना जाता है।
शांति का प्रतीक: , भोंगापाल में महाशिवरात्रि पर लोग बड़ी संख्या में एकत्र होकर स्थानीय गायत्री परिवार एवं समिति के द्वारा एक कुंडीय गायत्री महायज्ञ का के साथ, जल अभिषेक किया जाता है और गायत्री परिवार एवं समिति के द्वारा प्रसाद के रूप में खिचड़ी का भंडारा किया जाता है
इस दौरान, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, और वे धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन में भाग लेते हैं। भोंगापाल का यह मंदिर न केवल जिला का बल्कि छत्तीसगढ़ के भक्तों के लिए आस्था और चमत्कारों का केंद्र बन गया है
पर्यटन स्थल: भोंगापाल की बौद्ध प्रतिमा और चैत्य गृह का स्थल, छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा संरक्षित है और यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र है।

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