*क्षेत्र में दिखी जागरूकता बदहाल सड़क से त्रस्त ग्रामीणों ने किया चक्का जाम, वहीं कांग्रेस का मिला पुरा समर्थन*
दुर्गुकोंदल,
बरहेली गांव की जर्जर सड़कों से परेशान ग्रामीणों का सब्र आखिर टूट गया और उन्होंने आज सड़क पर उतरकर चक्का जाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार चल रहे भारी अधिभार वाले ट्रकों के कारण सड़क पूरी तरह टूट चुकी है, जिससे आमजनजीवन प्रभावित हो रहा है।
चक्का जाम के दौरान ग्रामीणों ने माइंस से आने-जाने वाले बड़े और अधिभार लादे हुए ट्रकों को रोक दिया, जबकि चार पहिया जैसे छोटे वाहनों को समझदारी पूर्वक निकलने दिया। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और अपनी नाराजगी व्यक्त की।
माइंस प्रबंधन रहा नदारद
पूर्व सरपंच बाबूलाल कोला ने जानकारी देते हुए कहा कि ग्रामीणों द्वारा सुबह से चक्का जाम किया गया, लेकिन माइंस प्रबंधन मौके पर स्थिति जानने तक नहीं पहुंचा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और माइंस प्रबंधन इस समस्या का समाधान नहीं करता तो आने वाले दिनों में पूर्ण चक्का जाम किया जाएगा और तब सभी वाहनों को रोका जाएगा।
कोला ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल दिखावे के लिए सड़क पर मुरम और गिट्टी डालकर ग्रामीणों को गुमराह कर रहा है। भारी वाहनों के दबाव के सामने अस्थायी मरम्मत टिक नहीं पाई और बारिश के साथ ही सड़क फिर से खराब हो गई। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि जब ट्रक अधिभार के साथ सड़क पर दौड़ते हैं तो उसी क्षमता के अनुसार मजबूत और टिकाऊ सड़क का निर्माण होना चाहिए।
सड़क पर लेटकर प्रदर्शन की चेतावनी
ग्रामीणों ने कहा कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो वे सड़क पर लेटकर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि शासन-प्रशासन या तो भारी ट्रकों की आवाजाही बंद करे या फिर नई, सुदृढ़ सड़क का निर्माण तत्काल किया जाए।
कांग्रेस का मिला समर्थन
ग्रामीणों के इस आंदोलन को कांग्रेस ने समर्थन दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहले भी उनके धरना-प्रदर्शन की चेतावनी के बाद ही आमागढ़ से दमकसा मार्ग पर लिपाई-पुताई का काम किया गया था। हालांकि बारिश में गिट्टी बह जाने से वह प्रयास भी बेकार हो गया। अब ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक भारी वाहनों के अनुरूप सड़क निर्माण नहीं होता, वे संघर्ष जारी रखेंगे।
ग्रामीणों की एकजुटता
बरहेली और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया है कि अब वे किसी तरह की आश्वासनबाजी से गुमराह नहीं होंगे। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।



