पहले दिन से ही इस प्रकरण में छात्र संगठन और स्थानीय प्रतिनिधि दोषी शिक्षक को तत्काल निलंबित करने और कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पिटाई से घायल छात्र को मानसिक और शारीरिक आघात पहुंचा था, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी ने इस गंभीर मामले को नजरअंदाज कर दिया। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
युवा नेता गोविन्द कश्यप ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि दोषी शिक्षक आज भी उसी स्कूल में पदस्थ है। छात्रों और अभिभावकों में भय का माहौल है। आखिर प्रशासन आरोपी शिक्षक को संरक्षण क्यों दे रही है? यदि इतनी बड़ी घटना के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा के माहौल को सुरक्षित रखने के लिए दोषी शिक्षक को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए। एक ओर शासन-प्रशासन बच्चों के अधिकार और बाल संरक्षण की बातें करता है, वहीं दूसरी ओर पिटाई जैसी घटनाओं को नज़रअंदाज कर दिया जाता है। यह बेहद शर्मनाक स्थिति है।
गोविन्द कश्यप ने सवाल उठाया कि यदि किसी सामान्य व्यक्ति पर आरोप लगता है तो प्रशासन तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन यहां क्यों चुप्पी साधी गई है? क्या प्रशासन जानबूझकर इस शिक्षक को बचा रहा है? यदि ऐसा है तो यह न्याय की पूरी तरह से अवहेलना है और छात्रों के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को ज्ञान और संस्कार देना है, न कि भय और हिंसा के सहारे अनुशासन थोपना। जो शिक्षक बच्चों पर अत्याचार करता है, वह समाज में शिक्षक कहलाने के योग्य नहीं है। ऐसे शिक्षकों को तत्काल सेवा से बाहर करना ही एकमात्र विकल्प है।
युवा नेता ने यह भी कहा कि इस घटना को लेकर चक्काजाम और विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। बावजूद इसके, प्रशासन ने केवल आश्वासन तक सीमित रहना उचित समझा। जबकि छात्रों और उनके परिजनों को न्याय दिलाना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी थी।
गोविन्द कश्यप ने चेतावनी दी कि यदि दोषी शिक्षक पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो युवा वर्ग एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगा। इस आंदोलन में न केवल छात्र, बल्कि आम नागरिक भी शामिल होंगे। यह मामला सिर्फ एक छात्र का नहीं बल्कि पूरे शिक्षा जगत के भविष्य का सवाल है।
उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि तत्काल इस प्रकरण पर निर्णय लेकर दोषी शिक्षक को बर्खास्त किया जाए।
अंत में गोविन्द कश्यप ने कहा कि प्रशासन को अब देर नहीं करनी चाहिए। जितनी देर होगी, उतना ही छात्रों और समाज में आक्रोश बढ़ेगा। न्याय तभी होगा जब दोषी शिक्षक को दंड मिलेगा और शिक्षा के मंदिर को हिंसा और डर से मुक्त किया जाएगा।



