Homeछत्तीसगढ़बस्तर में एक शक्तिपीठ जिसे भूल गया भारतीय जन मानस।।

बस्तर में एक शक्तिपीठ जिसे भूल गया भारतीय जन मानस।।

प्राचीन अष्टादश शक्तिपीठ स्त्रोतम में चक्रकाेट की माणिक्य देवी शक्तिपीठ का उल्लेख मिलता है। इसमें भारत के प्राचीन प्रमुख अठारह शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है। 

लङ्कायां शाङ्करी देवी कामाक्षी काञ्चिकापुरे ।

प्रद्युम्ने शृङ्खलादेवी चामुण्डी क्रौञ्चपट्टणे ॥ 1 ॥

अलम्पुरे जोगुलाम्बा श्रीशैले भ्रमराम्बिका ।

कोल्हापुरे महालक्ष्मी माहूर्ये एकवीरिका ॥ 2 ॥

उज्जयिन्यां महाकाली पीठिक्यां पुरुहूतिका ।

उत्कले गिरिजादेवी माणिक्या चक्रकोटिली ॥ 3 ॥

हरिक्षेत्रे कामरूपा प्रयागे माधवेश्वरी ।

ज्वालायां वैष्णवी देवी गया माङ्गल्यगौरिका ॥ 4 ॥

वारणस्यां विशालाक्षी काश्मीरेषु सरस्वती ।

अष्टादश सुपीठानि योगिनामपि दुर्लभम् ॥ 5 ॥

बस्तर को आठवीं सदी से चौदहवीं सदी तक चक्रकोट कहा जाता था। उस काल के विभिन्न शिलालेखों में चक्रकोट का उल्लेख मिलता है। 

चक्रकोट (बस्तर) में ग्यारहवीं सदी अर्थात छिंदक राजवंश के राजा जगदेक भूषण प्रथम के भैरमगढ़ शिलालेख में माणिक्य देवी का उल्लेख मिलता है। (1023 ईस्वी 1063ईस्वी)

इसके बाद छिंदक राजवंश के सोमेश्वर देव द्वितीय के बत्तीसा मंदिर बारसूर शिलालेख 1210 ईस्वी में माणिक्य देवी का उल्लेख मिलता है। 

इसके बाद अन्नमराज देव 1324 ईस्वी को माणिक्य देवी से तलवार प्राप्ति का उल्लेख राजवंशावली में मिलता है।

महाराज्ञी मेघावती 1410 ईस्वी को माणिक्य देवी का साधिका कहा गया है। 

1709 ईस्वी के बाद राजपाल देव के ताम्रपत्र में माणिकेश्वरी देवी का उल्लेख मिलता है। 

अब आप बताइए कि चक्रकोट की माणिक्य देवी का शक्तिपीठ बस्तर में कौन सा है? जिसका उल्लेख प्राचीन अष्टादश शक्तिपीठ स्त्रोतम में है।

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