Sunday, May 10, 2026

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*अमित शाह के जगदलपुर दौरे पर सर्व आदिवासी समाज रखेगा “नक्सल मुक्त बस्तर” के विकास का विजन*,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,* बीजापुर जिले से दीपक मरकाम की खबर*

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*अमित शाह के जगदलपुर दौरे पर सर्व आदिवासी समाज रखेगा “नक्सल मुक्त बस्तर” के विकास का विजन*,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,* बीजापुर जिले से दीपक मरकाम की खबर*

बीजापुर दिनांक 09 मई 2026

*सुरक्षा के बाद अब समृद्धि, रोजगार, संस्कृति और ग्रामसभा आधारित विकास मॉडल पर केंद्र से होगी चर्चा*

 

बीजापुर: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 19 मई को प्रस्तावित जगदलपुर प्रवास को लेकर बस्तर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। इस दौरान सर्व आदिवासी समाज का एक प्रतिनिधिमंडल गृहमंत्री से सौजन्य मुलाकात कर “नक्सल मुक्त बस्तर” के लिए संतुलित और समावेशी विकास मॉडल का प्रस्ताव रखेगा।

समाज का कहना है कि अब बस्तर को केवल सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि देश के सामने आदिवासी नेतृत्व वाले विकास मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने का समय आ गया है।

समाज द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से बस्तर में नक्सल हिंसा में कमी आई है। ऐसे में अब सबसे बड़ी जरूरत विकास को गांवों तक पहुंचाने और उसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने की है। प्रतिनिधिमंडल गृहमंत्री के समक्ष यह मांग रखेगा कि विकास योजनाओं का स्वरूप बस्तर की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना और आदिवासी अस्मिता के अनुरूप हो।

समाज ने स्पष्ट किया है कि सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ गोटूल, पेन स्थल, आदिवासी बोली और परंपरागत वन अधिकारों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। विकास की प्रक्रिया में बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में रखने की मांग की जाएगी।

प्रेस विज्ञप्ति में स्थानीय रोजगार और आजीविका के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया है। समाज का कहना है कि लघु वनोपज, पर्यटन, काष्ठकला और विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा जैसी सांस्कृतिक धरोहरों को रोजगार से जोड़कर स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। बाहर से ठेकेदारों को लाने के बजाय स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी रखी जाएगी।

प्रतिनिधिमंडल अंदरूनी और नक्सल प्रभावित गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति का मुद्दा भी उठाएगा। स्कूलों और अस्पतालों में स्थायी शिक्षक एवं डॉक्टरों की नियुक्ति तथा आदिवासी भाषाओं में शिक्षा व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया जाएगा।

इसके अलावा भूमि, जल और वन संसाधनों से जुड़ी विकास परियोजनाओं में ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य करने और पीवीटीजी समुदायों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की जाएगी।

प्रकाश ठाकुर ने कहा कि जगदलपुर में होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक बस्तर के बदलाव का प्रतीक बन सकती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की सफलता को अब विकास की ठोस नींव में बदलने की जरूरत है और यह विकास स्थानीय आदिवासी समाज की सहमति, भागीदारी और नेतृत्व में होना चाहिए।

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