Friday, May 8, 2026

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विकास की रफ्तार पर कमीशनखोरी का ब्रेक ? अंतागढ़-नारायणपुर सड़क परियोजना में भुगतान अटकाने और मोटी रकम मांगने के आरोप, ठेकेदार ने थाने में दी शिकायत। आर एल कुलदीप की खबर..।

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विकास की रफ्तार पर कमीशनखोरी का ब्रेक ?

अंतागढ़-नारायणपुर सड़क परियोजना में भुगतान अटकाने और मोटी रकम मांगने के आरोप, ठेकेदार ने थाने में दी शिकायत

भानुप्रतापपुर। बस्तर संभाग में वर्षों से नक्सल प्रभाव और अविकसित ढांचे के बीच अब शासन द्वारा सड़क और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इन्हीं बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में अंतागढ़ से नारायणपुर तक बन रही महत्वपूर्ण सड़क भी शामिल है, जिसे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की रीढ़ माना जा रहा है। लेकिन अब इस बड़े विकास कार्य पर विभागीय भ्रष्टाचार और कथित कमीशनखोरी के आरोपों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सड़क भानुप्रतापपुर को अंतागढ़, नारायणपुर, कोंडागांव, जगदलपुर और दंतेवाड़ा जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जोड़ने वाली अहम कड़ी मानी जा रही है। सड़क निर्माण पूर्ण होने के बाद आम लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलने के साथ व्यापार, परिवहन और खनिज गतिविधियों को भी सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर नारायणपुर क्षेत्र में संचालित माइनिंग कार्यों के कारण शासन के राजस्व में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

 

इसी बीच सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदार नवीन अग्रवाल ने भानुप्रतापपुर थाना में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर लोक निर्माण विभाग में पदस्थ DA सूरज कुमार साहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि लगभग 465 लाख रुपये के लंबित भुगतान को जारी करने के एवज में 10 लाख रुपये की मांग की गई।ठेकेदार का आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, इसके बावजूद जानबूझकर फाइल और चेक रोके जा रहे हैं।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भुगतान के लिए लगातार संपर्क करने पर मानसिक दबाव बनाया गया तथा अपमानजनक व्यवहार किया गया। सूत्रों के मुताबिक मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस की स्थिति बन गई। चर्चा यह भी है कि ठेकेदार ने संबंधित कर्मचारी के निवास पहुंचकर बातचीत करने का प्रयास किया, जहां कथित रूप से साफ शब्दों में कहा गया — “पैसे दिए बिना भुगतान संभव नहीं है”, साथ ही अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया गया।

 

यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल विभागीय अनियमितता का मामला नहीं रहेगा, बल्कि बस्तर के विकास कार्यों की गति को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय माना जाएगा। क्षेत्र में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं भी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ जाएंगी, या शासन ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई कर विकास कार्यों को पारदर्शिता और गति के साथ आगे बढ़ाएगा।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल गर्म है और लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

 

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