तुम्हें योजना से दिक्कत नहीं गांधी से दिक्कत है क्योंकि गांधी याद दिलाते हैं कि सत्ता का मतलब सेवा….
…..याद रखो गांधी ना पोस्टर है ना योजना का शीर्षक, गांधी वो सवाल है जो हर भूखे पेट से उठता है….जिस मिट्टी में मजदूर का पसीना गिरा है वहा गांधी लिखा है….
शहर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व महामंत्री/प्रशासन अनवर खान प्रेस नोट जारी कर बताया कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गारंटी के रूप में रोजगार को कानून गारंटी का नाम दिया लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा की साय सरकार ने (मनरेगा) नाम बदलकर इसे बंद करने की साजिश कर रही है। जो न्याय संगत नही केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले 11 सालों में मनरेगा को पर्याप्त बजट नहीं दिया तथा हर साल मनरेगा के बजट में 30 से 35% की कटौती की गई, 11 वर्षों में मनरेगा की मजदूरी में न्यूनतम वृद्धि है जिसके कारण मजदूर वर्ग की आय स्थिर हो गई है तथा महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है।
खान ने कहा कि मनरेगा कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाने का निर्णय भाजपा की गांधी जी के प्रति विद्वेष को भावना उजागर करता है यह भाजपा का राजनैतिक दिवालियापन है गांधी जी श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और गरीबों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी के प्रतीक रहे है यह नाम परिवर्तन गांधी जी के मूल्यों के प्रति भाजपा-आरएसएस की दीर्घकालिक असहजता और अविश्वास को दर्शाता है तथा एक जन-केंद्रित जनकल्याणकारी कानून से राष्ट्रपिता के जुड़ाव को मिटाने का प्रयास जो निंदनीय है।
खान ने कहा कि महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गारंटी मनरेगा का नाम बदलने के लिऐ संसद में विधेयक लाना मोदी सरकार की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति दुर्भावना को प्रदर्शित करता है भाजपा सोचती है कि वह एक योजना से गांधी जी का नाम बदलकर गांधी जी को जनमानस से दूर कर लेगी तो यह उनकी नकारात्मक सोच व भूल है भाजपा का कोई भी षड़यंत्र भारत के लिए गांधी जी के योगदान को नही मिटा सकता।
यूपीए की मनमोहन सरकार मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को हर साल 100 दिन का गारंटी योजना प्रदान किया इसमें सड़क निर्माण तालाब और कुएं की खुदाई जल संरक्षण और सुखा राहत जैसे सार्वजनिक कार्य शामिल किए जाते थे यदि आवेदक को 15 दिन के भीतर काम उपलब्ध नहीं कर पाए तो व्यक्ति भुगतान का पात्र माना जाता था लेकिन भाजपा की सरकार आने के बाद हितग्राहियों को ना काम में मिल रहा ना भुगतान मजदूर सेठ सौकारों के यहां गुलाम की तरह मजदूरी करने को बेबस हो रहे हैं कांग्रेस शासन में दी जाने वाली 100 दिन की रोजगार गारंटी योजना को समाप्त कर उन पर कुठाराघात किया जा रहा है जो गरीबों, निःसहाय, मजदूरों और बेसहारों के साथ अन्याय है।






