Thursday, April 16, 2026

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*मोहला—मोहला ब्लॉक के जनपद पंचायत के सरपंच सचिव की करतूत, फर्जी बिलों का भुगतान कर शासन के खजाने में लगा रहे सेंध*

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मनीष कौशिक मोहला

मोहला — वित्तीय मामलों में पारदर्शिता के लिए शासन स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों और बिचौलियों की मिलीभगत के सामने सभी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसा ही मामला जनपद पंचायत मोहला की एक ग्राम पंचायत का मामला प्रकाश में आया है। यहां स्टेशनरी, मटेरियल, फोटो कॉपी, प्रिंट ऑउट के साथ ही मटेरियल खरीदी के नाम पर कीमत से ज्यादा के बिल बाउचर लगाकर शासकीय राशि खुर्द-बुर्द की जा रही है। ग्राम पंचायत के सचिव और सरपंच ने स्टेशनरी सामग्री, फोटो कॉफी, प्रिंट आउट, मटेरियल खरीदी के नाम पर कीमत से अधिक सप्लायरों को भुगतान किया है। इसके अलावा त्यौहार और उत्सव के नाम पर लाखों रुपए खर्च का बिल का भुगतान कर दिया गया।

कम्प्यूटर व फोटो कॉपी मशीन उपलब्ध, लगा रहे बिल

 

कृषि दुकान से रेत, लोहा खरीदी के बिल

सरकारी राशि का किस तरह बंदरबांट किया जाता है ग्राम पंचायत में देखने मिली है। यहां सरपंच व सचिव निर्धारित कीमत से दोगने कीमत में बिलों का भुगतान कर अपने चहेते सप्लायरों को आर्थिक लाभ पहुंचा रहे हैं। शासकीय पोर्टल पंचायत दर्पण में लगे बिल बाउचरों को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह जिम्मेदार शासकीय राशि का बंदरबांट कर रहे हैं। स्थिति यह है कि निर्माण सामग्री सप्लाई की दुकान से स्टेशनरी खरीदी जा रही है और कृषि दुकान से रेत, लोहा, खरीदने के बिल लगाए गए हैं और उसका भुगतान भी हो रहा है। इसके अलावा जो बिल लगाए गए हैं उनमें भी कई कमियां हंै। इनमें से कई कमियां है जिसमें तारीख सहित अन्य जानकारी भी उल्लेख नहीं है। धुंधले और गलत जीएसटी नंबर वाले बिलों के जरिए लाखों का भुगतान किया जा रहा है।

गलत जीएसटी नंबर के बिल भी शामिल

ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यो के भुगतान के लिए जीएसटी नंबर होना अनिवार्य किया है। ग्राम पंचायत में सरपंच, सचिव के द्वारा गलत जीएसटी नंबर वाले बिलों का भी भुगतान बड़ी आसानी से किया जा रहा है। सरकार ने पंचायतों में किए जा रहे भुगतानों में पारदर्शिता लाने के लिए जीएसटी नंबर अनिवार्य किया है, मगर ग्राम पंचायत में सरकार के आदेशों को दर किनार कर कार्य किया जा रहा है। स्थिति यह है कि रेत, गिट्टी, ईंट, सरिया, सीमेंट सहित फोटो काफी, प्रिंट आउट के बिलों के बिलो का जो भुगतान किया गया है उसका जीएसटी नंबर 14 अंक का है, जबकि जीएसटी नम्बर 15 अंको का होता है। इस जीएसटी नंबर के संबंध में कहीं कोई जानकारी नहीं है।

*नहीं हो रही कार्रवाई*

 

*ग्राम पंचायत के जिम्मेदार खुलेआम शासकीय राशि को खुर्द-बुर्द कर रहे हैं। इसके बाद भी जनपद व जिला पंचायत में बैठे अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।*

*ये कोई नहीं बात नहीं है इसे पहले भी मोहला जनपद पंचायत में स्वच्छता कीट के मामले में पंचायत से लाखों रुपए का हेरा फेरी का मामला भी प्रकाशन हुआ था जिम्मेदार अधिकारी नहीं कर पाते करवाई इसीलिए हौसले बुलंद है*

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