भोंगापाल की 6वीं सदी की मूर्तियों को पहुंचाया नुकसान, ग्रामीणों ने सीसी कैमरा के साथ सुरक्षा की मांग
बस्तर कोडागांव जिला के भोंगापाल गांव में घने जंगल के साथ ही पौराणिक मान्यताओं और वर्षों पुरानी सभ्यताओं से जुड़ा हुआ बस्तर की भोंगापाल के जमीन में खनिज संसाधनों के साथ ही 6 शताब्दियों मूर्तियां स्थापित है
इन मूर्तियां को सहेजने का काम करने के लिए 1 जून को बुद्ध महोत्सव का आयोजन किया गया था
कोंडागांव जिले के प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल भोंगापाल में एक बार फिर प्राचीन मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। अज्ञात लोगों ने देवी-देवताओं और गौतम बुद्ध सात रानियां की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
सोमवार सुबह जब स्थानीय पटेल सहित भक्त पूजा के लिए पहुंचे तब यह जानकारी सामने आई। भोंगापाल को संरक्षित स्थल घोषित किया गया है। लेकिन यहां कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है आये दिन
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पिछले चार बार ऐसी घटना हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी आस्था और इतिहास के प्रतीकों को बार-बार नष्ट किया जा रहा है।
प्राचीन मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा
दोषियों के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई जिसका परिणाम लगातार क्षतिग्रस्त किया जा रहा है
ग्रामीणों का कहना है हम सिर्फ मांग करते जा रहे हैं लेकिन कोई उसका परिणाम नहीं मिल रहा है 1 जून को इतनी बड़ी कार्यक्रम जो बुद्ध महोत्सव में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री आकर देखकर दर्शन कर जा चुके हैं लेकिन यहां का हालत जैहा था वैसा ही है ना कोई सुरक्षा का इंतजाम नहीं हुआ है लोगों की मांग है सबसे पहले सीसी कैमरा की
पुरातत्व विभाग ने केवल 6वीं शताब्दी की इस धरोहर का बोर्ड लगाकर छोड़ दिया है। अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्राम पंचायत ने पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा है। सरपंच रामसाय नाग ने मंदिर की सुरक्षा के लिए केयरटेकर नियुक्त करने और सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है।



