*बिग ब्रेकिंग……जिसकी हमें तलाश थी जो आके आज मिली तब दिल को सकुन मिला लेकिन बहुत दांवपेंच करना पडा। आर,एल,कुलदीप की रिपोर्ट:-।*
दुर्गूकोंदल:-
बतादूं कि मेरे द्वारा 17अप्रैल को एक खबर प्रकाशित किया गया था उस खबर की सच्चाई तक पहुंचने को तीन दिन लग गये आखिर कर मै तमाम जानकारी लेकर एक खबर निकाला हुं जनता व हमारे पाठको के बीच जो मजेदार तो है ही साथ ही पीडा दायक भी।
मजेदार यानि…………
विभाग के भ्रष्टाचार अधिकारियों के चलते सांठगांठ से ठेकेदार की मनमानी और घोटाला नजर आती है वही घोटाला के चलते कोई अधिकारी जांच करने नही आते है अधिकारीयों को शायद कमीशन से ही मतलब रहता होगा जिसके चलते कोई अधिकारी जांच करना उचित नही समझते होंगें हमें जो मिलना था सो मिल गया फाईल आगे बढानें का काम है सोंचकर ही जांच करने नही जाते होंगे… लेकिन समझ से परे है कई ऐसे अधिकारी कर्मचारी जो प्रशासन के नियमों की ऐसे धज्जियाँ खुलेआम बेखौफ उडाते नजर आते है की आम जनता की आवाज उनके कानो तक नही पहुंचती है।जब्कि उनकी सरकारी नौकरी उस आम जनता के लिए होती है जिसके एवज में वे प्रत्येक महिने का पगार के रूप में पाते है लेकिन ऐसे अधिकारी कर्मचारी होते है जो भ्रष्टाचार में लिप्त होकर उस जनता का आवाज को दबाने के साथ पुरी तरह शोषण करने में माहिर होते है उन्हें जनता से कोई मतलब ही नही होता।
दुर्गूकोंदल के अंतिम छोर के ग्राम पंचायत पचांगी में बन रही पक्की सडक संबंधित सडक बनाने वाले विभाग तो विभाग ग्राम पंचायत के सरपंच ना कि ग्रामीणों को भी पता नही लेकिन सडक बन रही है वह भी गुणवत्ताहीन
क्योंकि वहां बोर्ड भी नही लगी है कौन सी विभाग कितनी की लागत कितना कार्य दिवस अवधी किसी को नही पता।
*भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई लोक निर्माण विभाग की सड़क,,,,,,,,*
*फाईलों में बन गई सड़क,,,, अधिकारी झांकने तक नहीं गये मतलब मिल गई होगी नोटो का बंडल कडक….?*
भ्रष्टाचार को रोकने मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि जोभी अधिकारी कर्मचारी अगर प्रधानमंत्री मकान के नाम से पैसा मांगता है या सच्चाई पाई जाती है तो जिला के मुख्या के उपर कार्यवाही होगी।।,,,,,,
अब बात आती है लोकनिर्माण विभाग की अगर इसमें भ्रष्टाचार होती है तो क्या मुख्यमंत्री स्वयं दोषी कहलाएंगे या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचार ?
पाठकगण आप सभी समझ सकते हैं कि जिस तरह मुख्यमंत्री ने अपने शब्दों में तो कह दिया लेकिन यह शब्द केवल लोगों को सुनाने के लिए कहें हैं या उन शब्दों का अमल भी करेंग,,?
हम बात कर रहे हैं वह लोकनिर्माण विभाग सडक की जिसे अंदरूनी गांवों-कस्बों से निकाल कर मुख्य मार्ग को जुडती है ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा हो लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी अगर ठेकेदार से मिलकर लोगों के विकास के लिए आये हुवे पैसे की बंदरबांट करें तो कहां तक उचित है….?
हम बात कर रहे हैं जनपद पंचायत दुर्गूकोन्दल के अंतिम छोर ग्राम पंचायत की जहां ठेकेदार की मनमानी और अधिकारियों की लापरवाही ने लोगो की आशा को निराशा में बदल दी है। गुणवत्ताहीन सडका निर्माण हो गया जहां सुचना बोर्ड भी नहीं लगा है ठेकेदार कौन स्वीकृती राशि कितनी कब कार्य चालू करना है और कब खत्म होगी उसकी गुणवत्ता क्या होगी कितनी लेयर जानी है कितना एम एम तक अलकतरा बिछाया जायेगा कौन सी क्वालिटी की मटेरियल दिया जायेगा उक्त सड़क पर,
ठेकेदार का मुनिम का कहना है सड़क बनकर तैयार हो गया है
हमने पुछा यहां बोर्ड भी नहीं लगा है कौन सा विभाग का है ठेकेदार कौन है लागत क्या है कब कार्य चालू करना है बोर्ड क्यों नहीं लगा है।लोगों को कैसे पता चलेगा।
मुनिम का जवाब था अभी लगायें और चले जायेंगे।तब देख लेना।
हमने कहा भाई साहब इतना तो बता कौन सा विभाग का है ।
मुनिम ने कहा उपर अधिकारियों के पास जाओ और पता लगा लो।
उसके बातों से ऐसा लग रहा था की भ्रष्टाचार की पैसे से उसके मुंह से बदबू आ रही थी।
अधिक जानकारी के लिए हमने संबंधित विभाग के इ इ महेंद्र कश्यप साहब और एसडीओ साहब गंगबेर से मिलने उनके आफिस तक गये मुलाक़ात नही हुई फिर फोन से सम्पर्क करने कि भरपूर कोशिश किये रिंग तो बराबर बजती है पर फोन किसी ने अटेंड नही किये।
अब देखना है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि व विधायक क्या कहते है इस विषय में क्या उक्त भ्रष्टाचार ठेकेदार व गुणवक्ताहीन अधिकारीयों पर कार्यवाही का आश्वासन देते है या कार्यवाही भी होती है।



