मनीष कौशिक मोहला
मोहला:—— ग्राम पंचायत मोहला के तत्कालीन उपसरपंच अब्दुल खलीक आत्मज मोहम्मद याकूब के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 91तथा धारा 40 के तहत बर्खास्तगी के कार्रवाई के संबंध में न्यायालय कलेक्टर ने आदेश पारित किया है कि अब्दुल खलीक तत्कालीन उपसरपंच ग्राम पंचायत मोहला के ऊपर लगाए गए सारे आरोप निराधार है इस प्रकार अब्दुल खलीक आरोप मुक्त है। उनके उपर 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ने के आदेश को भी पलटते हुए न्यायालय कलेक्टर ने उक्त आदेश को निरस्त कर दिया है। मामले की पैरवी जिले के मशहूर अधिवक्ता कादिर सिद्दिकी ने किया जिनके द्वारा प्रस्तुत तर्कों के प्रतिपक्ष में प्रशासन बौना साबित हुआ एवं झूठ के पुलिंदा में फंसे एक सक्रिय जनप्रतिनिधि के साथ न्याय हो पाया है।
*प्रकरण में कलेक्टर ने दिया आदेश, 6 साल के लिए निष्काषन भी हुआ खत्म*
प्रकरण में कलेक्टर ने स्पष्ट आदेश दिया है कि उपसरपंच द्वारा उक्त राशि लेने एवं फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाना प्रमाणित नहीं होता है, जांच रिपोर्ट भी अस्पष्ट एवं पूर्णतः प्रमाणित नहीं है। कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र की मूल प्रति भी प्रकरण में प्रस्तुत नहीं की गई है जिसके आधार पर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाना प्रमाणित होता हो। जिन साक्ष्यों के मध्य राशि का लेन देन हुआ उसके द्वारा भी प्रतिपरीक्षण के दौरान उपसरपंच को सीधे राशि हस्तांतरित नहीं करने की बात कही गई तथा बेगुनाह होना बताया गया। उक्त आधार पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मोहला द्वारा पारित आदेश दिनांक 10.5.2024 एवं 09.01.2025 स्थिर रहने योग्य नहीं है। उक्त दोनों आदेशों में परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण भी नहीं किया गया एवं इस न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 04.09.2024 की अवहेलना की गई है। अतः उक्त दोनों प्रश्नाधीन आदेश अपात्र किया जाता है साथ ही साथ अभ्यर्थी को 6 वर्ष तक अनहरित किए जाने संबंधी आदेश लागू नहीं होगा।
अभ्यर्थी अब्दुल खलीक ने कहा कि मैं शुरू से कह रहा हूं कि निर्दोष हूं, भाजपा के द्वारा सत्ता का दुरुपयोग किया गया एवम कांग्रेस के कर्मठ कार्यकर्ता को बदनाम करने हेतु झूठ के साथ प्रपंच रचा गया। सत्ता के दबाव में अनुविभागीय अधिकारी द्वारा विधि विरुद्ध आदेश पारित किया गया था जो की न्यायालय कलेक्टर ने अपने आदेश में पुष्टि की है उक्त विधी विरुद्ध आदेश भाजपा नेताओं और मंत्रियों के दबाव में पारित किया गया है। पूरा तंत्र सत्ता पक्ष के इशारों पर विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के ऊपर गैर संवैधानिक हथकंडा अपनाकर अनावश्यक दखलंदाजी का कार्य किया जा रहा है।
*सत्ता पक्ष के नेताओं एवं अधिकारियों ने दबावपूर्वक कुटरचना कर मेरे विरुद्ध षडयंत्र किया, मुझे न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था आज दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। मैं जनप्रतिनिधि के साथ-साथ समाज एवं व्यापारिक दृष्टिकोण से सक्रिय रहता हूं मेरे छवि को धूमिल किया गया। आखिर में जीत सत्य की हुई।*
*अब्दुल खलीक*





