
सरायपाली. ब्लॉक के तीन उप
स्वास्थ्य केंद्रों नूनपानी, सेमलिया और सिंघोड़ा के भवन जर्जर होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ी है। इन केंद्रों में न तो ओपीडी संचालित हो रही है और न ही प्रसव की सुविधा गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध है। परिणाम आसपास के ग्रामीणों परिणामस्वरूप किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायपाली जाना पड़ रहा है।
नूनपानी उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन विगत 10 वर्षों से (2016 से) जर्जर है। यहां ओपीडी और प्रसव सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं। केंद्र के पास स्वयं का भवन नहीं होने और शासकीय भवन की व्यवस्था न होने -से कोकड़ी, चकरदा जैसे गांवों के मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की शरण लेनी पड़ रही है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान नजदीकी सरकारी सुविधा नहीं मिल रही, जिससे उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ता है। बरसात के मौसम में मौसमी बीमारियों से जूझ रहे ग्रामीणों को भी ओपीडी बंद होने से सरकारी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही। केंद्र में तैनात दो कर्मचारी केवल फील्ड कार्य कर रहे हैं। जर्जर भवनों की मरम्मत की मांग की जा चुकी है, लेकिन विभाग के द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे सेवा ठप है।
*भवन के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं ठप*
तीनों उप स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारी पदस्थ हैं, लेकिन उनके पास न तो सरकारी भवन है और न ही निजी भवन में वैकल्पिक व्यवस्था। इससे मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। जर्जर भवनों और सुविधाओं के अभाव के कारण ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। खर्च भी बढ़ जाता है। बरसात में मौसमी बीमारियों के इलाज और गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव सुविधा न होना उनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द इन केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल की जाएं।
*बजट की कमी बताकर काम रोका, फिर प्रारंभ नहीं*
नूनपानी में पदस्थ ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि 2016 से भवन जर्जर होने के कारण केंद्र बंद है। वैकल्पिक तौर पर एक निजी मकान में किराए पर केंद्र संचालित करने का दावा किया गया है, लेकिन ओपीडी और प्रसव कार्य नहीं हो रहे। पूर्व में 27.85 लाख रुपये की लागत से भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हुई थी और कालम के लिए गड्डा खोदने का काम शुरू हुआ था, लेकिन बजट की कमी का हवाला देकर ठेकेदार ने काम रोक दिया। इसके बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा। एक निजी
व्यक्ति के कब्जे के कारण भी निर्माण में देरी हुई। उसी समय स्वीकृत परसकोल उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन बन चुका है। इस संबंध में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एच एल जांगड़े से संपर्क करने प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
*हैंडओवर नहीं*
सेमलिया उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी जर्जर है और कई वर्षों से बंद पड़ा है। हालांकि, वहां एक नया सरकारी भवन बन चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को हैंड ओवर न होने के कारण उपयोग नहीं हो रहा। यहां भी ओपीडी और प्रसव सेवाएं बंद हैं, जिससे ग्रामीणों को अन्य केंद्रों या सरायपाली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ रहा है। सिंघोड़ा में जर्जर भवन को डिस्मेंटल कर उप स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थानांतरित किया गया है, लेकिन वहां भी सुविधाएं नहीं हैं।

