Homeछत्तीसगढ़*सर्व आदिवासी समाज का अल्टीमेटम: ‘भोपालपटनम में मुर्गा बाजार के नाम पर...

*सर्व आदिवासी समाज का अल्टीमेटम: ‘भोपालपटनम में मुर्गा बाजार के नाम पर बंद हो सट्टा-दारू का खेल, परंपरा का सम्मान रहे बरकरार’*

*सर्व आदिवासी समाज का अल्टीमेटम: ‘भोपालपटनम में मुर्गा बाजार के नाम पर बंद हो सट्टा-दारू का खेल, परंपरा का सम्मान रहे बरकरार’*

भोपालपटनम,04 अक्टूबर 2026

बीजापुर जिले के भोपाल पटनम क्षेत्र रूद्ररम  में पारंपरिक त्यौहारों के नाम पर सामाजिक मर्यादाओं को तार-तार करने वाली गतिविधियों पर सर्व आदिवासी समाज ने कड़ा रुख अपनाया है।

 

समाज के प्रमुखों ने भोपालपटनम के रुद्ररम में मुर्गा बाजार की आड़ में धड़ल्ले से चलाए जा रहे सट्टे के कारोबार, अवैध शराब की बिक्री और फैल रही गंदगी पर गहरी आपत्ति जताते हुए शासन-प्रशासन से इस पर तत्काल पूर्ण रोक लगाने की मांग की है।

*परंपरा की आड़ में अनैतिक गतिविधियां बर्दाश्त नहीं*

सर्व आदिवासी समाज का स्पष्ट कहना है कि पोला, उगादी और दशहरा जैसे प्रमुख पर्वों पर आदिवासी संस्कृति व परंपरा के अनुसार मुर्गा बाजार (मुर्गा लड़ाई) आयोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

यह हमारी सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर का हिस्सा है।

लेकिन दुखद पहलू यह है कि इस पारंपरिक आयोजन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व बड़े पैमाने पर अवैध सट्टा खिला रहे हैं और धड़ल्ले से शराब बेची जा रही है।

*गांव का माहौल खराब होने से समाज में रोष*

समाज के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि मुर्गा बाजार अब परंपरा से भटक कर अनैतिक गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है।

रुद्ररम में सट्टेबाज़ी और शराबखोरी के चलते न केवल क्षेत्र में गंदगी फैल रही है, बल्कि गांव का शांतिपूर्ण और सांस्कृतिक माहौल भी दूषित हो रहा है। इससे युवा पीढ़ी पर बुरा असर पड़ रहा है और आए दिन विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है।

*प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग*

*सर्व आदिवासी समाज ने प्रशासन से स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि:*

परंपरागत आयोजन को संरक्षण: पोला, उगादी और दशहरा के अवसर पर केवल पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत मुर्गा बाजार की अनुमति दी जाए।

अवैध गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध: मुर्गा बाजार की आड़ में चलने वाले सट्टा-पट्टी, जुआ और अवैध शराब के कारोबार पर पुलिस व प्रशासन सख्त से सख्त कार्रवाई करे।

स्वच्छता व्यवस्था: आयोजन स्थलों पर गंदगी फैलाने वालों पर लगाम कसी जाए और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।

समाज ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इन असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया, तो सर्व आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक अस्मिता और ग्रामीण शांति की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा।

आपकी राय

[poll id="2"]

- Advertisment -spot_img

राशिफल

आज का मौसम

क्रिकेट लाइव स्कोर

Most Popular

RELATED ARTICLES