*भोपाल पटनम: एकलव्य मॉडल आवासीय बालिका विद्यालय मामला: केवल शिक्षक के निलंबन पर भड़का आदिवासी समाज, प्राचार्य पर FIR दर्ज न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी*
*भोपाल पटनम 04 अक्टूबर 2026*
एकलव्य आदर्श आवासीय कन्या छात्रावास, गोपालपट्टनम में छात्राओं के साथ हुई अभद्रता और प्रताड़ना के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
इस घटना को लेकर सर्व आदिवासी समाज और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
समाज ने आरोप लगाया है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में केवल शिक्षक पर कार्रवाई करके मुख्य जिम्मेदार प्राचार्य को बचाने का प्रयास कर रहा है।
इस संबंध में सर्व आदिवासी समाज (जिला बीजापुर) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रशासन की निष्पक्षता और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
*आदिवासी समाज की प्रमुख माँगें एवं चिंताएँ:*
*दोषी प्राचार्य को तुरंत किया जाए निलंबित:*
छात्राओं की सुरक्षा, अनुशासन और देखरेख की संपूर्ण नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी विद्यालय के प्राचार्य की होती है।
इसके बावजूद, इतनी गंभीर घटना के बाद भी दोषी प्राचार्य पर अब तक न तो कोई कानूनी कार्रवाई की गई है और न ही उन्हें निलंबित किया गया है।
*समाज ने अविलंब प्राचार्य के निलंबन की माँग की है*
*उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की माँग:*
*समाज का आरोप है कि रसूखदारों के दबाव और संरक्षण के कारण प्राचार्य का बचाव किया जा रहा है*
इसलिए इस पूरे मामले की किसी निष्पक्ष उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
*बेटियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं:*
आदिवासी बाहुल्य और संवेदनशील क्षेत्रों में बेटियों को शिक्षित और सुरक्षित माहौल प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने इन विद्यालयों की स्थापना की है।
यदि ऐसी सुरक्षित जगहों पर ही इस तरह की घटनाएँ होंगी और जिम्मेदार अधिकारी अपराधियों को बचाने में लगेंगे, तो समाज अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए बाहर भेजने से कतराएगा।
उग्र आंदोलन और कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी
सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने संयुक्त बयान जारी कर प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम दिया है।
समाज ने कहा है कि यदि आगामी 10 से 15 दिनों के भीतर दोषी प्राचार्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई/मामला (FIR) दर्ज कर उन्हें निलंबित नहीं किया गया, तो सर्व आदिवासी समाज सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन, चक्का जाम और कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए बाध्य होगा।
समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि बेटियों के सम्मान और न्याय की इस लड़ाई में पूरा समाज एकजुट होकर अंतिम सांस तक संघर्ष करेगा।

